ईरान में इंटरनेट पूरी तरह ठप, 120 घंटे से लोग परेशान, VPN चलाने वालों को मिली चेतावनी
ईरान में पिछले 5 दिनों से इंटरनेट सेवा लगभग पूरी तरह ठप पड़ी है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ यह इंटरनेट ब्लैकआउट (Blackout) अब 120 घंटे से ज्यादा समय से जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में कनेक्टिविटी गिरकर सिर्फ 1% रह गई है। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से यह सख्त कदम उठाया गया है, जिससे वहां रह रहे आम लोगों का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गया है।
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क्या है नया नियम और चेतावनी?
सरकार ने इस बार इंटरनेट बंदी के साथ बेहद कड़े नियम लागू किए हैं। MCI और Irancell जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां अपने यूजर्स को SMS भेजकर चेतावनी दे रही हैं। संदेश में साफ लिखा है कि अगर किसी ने बार-बार ‘इंटरनेशनल इंटरनेट’ से जुड़ने की कोशिश की, तो उनका नंबर ब्लॉक कर दिया जाएगा और मामला कानूनी अधिकारियों को सौंपा जाएगा।
इसके अलावा, VPN के इस्तेमाल पर भी भारी सख्ती बरती जा रही है। सरकार ने एक ‘इंट्रानेट’ (Intranet) लिस्ट जारी की है, जिसमें केवल कुछ सरकारी मंजूरी वाले ऐप्स और वेबसाइट ही चल रहे हैं। ये सभी ऐप्स ‘नेशनल इंफॉर्मेशन नेटवर्क’ पर काम करते हैं, जिनकी पूरी निगरानी सरकार करती है।
‘व्हाइट सिम’ और आम आदमी की मुसीबत
हैरानी की बात यह है कि देश में इंटरनेट सबके लिए बंद नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक ‘व्हाइट इंटरनेट’ सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत सरकारी अधिकारियों और कुछ खास मीडिया कर्मियों को ‘White SIM’ कार्ड दिए गए हैं। इन सिम कार्ड्स पर बिना किसी रोक-टोक के पूरा इंटरनेट चल रहा है।
दूसरी तरफ, आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहरों में स्टारलिंक (Starlink) के सिग्नल को रोकने के लिए जैमर लगाए गए हैं। यह सब तब हो रहा है जब दिसंबर 2025 में ही मोबाइल इंटरनेट के दाम 20% तक बढ़ाए गए थे। यानी जनता महंगा प्लान लेकर भी सेवा का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है।
ताज़ा हालात और सुरक्षा का डर
5 मार्च तक हालात सुधरने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। नेटब्लॉक्स (NetBlocks) ने पुष्टि की है कि ब्लैकआउट को 5 दिन पूरे हो चुके हैं। यह समय वहां के लोगों के लिए बहुत नाजुक है क्योंकि देश में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा जोरों पर है और मोजतबा खमेनेई को अगला सुप्रीम लीडर घोषित किए जाने की खबरें आ रही हैं।
मानवाधिकार समूहों ने चिंता जताई है कि इंटरनेट न होने के कारण लोगों को हमलों के दौरान जरूरी सुरक्षा अपडेट नहीं मिल पा रहे हैं। अस्पतालों और सुरक्षित स्थानों की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच रही है, जबकि अब तक 1,114 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस ‘सूचना शून्यता’ (Information Vacuum) पर गहरी चिंता व्यक्त की है।




