कच्चे तेल ने तोड़े रिकॉर्ड, भाव $120 तक जाने की आशंका, भारत में महंगाई बढ़ने का डर
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। Infomerics Ratings के Chief Economist मनोरंजन शर्मा ने चेतावनी दी है कि अगर यह झगड़ा लंबा चला, तो कच्चे तेल का भाव 120 डॉलर (USD 120) प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। 7 मार्च 2026 को तेल की कीमतें पहले ही 90 डॉलर का आंकड़ा पार कर चुकी हैं।
क्या है कच्चे तेल का मौजूदा हाल और भविष्य?
अभी हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर तेजी से 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के आसपास की गतिविधियों ने बाजार को डरा दिया है। जानकारों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो कीमतें और ऊपर जाएंगी। Infomerics के अनुसार, यह संकट लंबा खिंचा तो पूरी दुनिया के आर्थिक समीकरण बिगड़ सकते हैं।
भारत और आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, इसलिए यहां असर गहरा होगा। भारत का बजट कच्चे तेल के 70 डॉलर प्रति बैरल रहने के हिसाब से बना था। अगर कीमत 10 डॉलर बढ़ती है, तो देश में महंगाई 0.2 से 0.4 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। पड़ोसी देश पाकिस्तान ने तो पहले ही पेट्रोल-डीजल के दाम 55 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। भारत में भी माल ढुलाई और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
सरकारी खजाने पर कितना बोझ बढ़ेगा?
वित्त मंत्रालय ने भी माना है कि इस संकट का असर उम्मीद से ज्यादा गहरा हो सकता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक लग सकती है:
- कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का import bill 13-14 अरब डॉलर तक बढ़ जाता है।
- इससे देश का Current Account Deficit (CAD) भी प्रभावित होगा।
- अमेरिका ने हालांकि रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है, लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकती है।
- शेयर बाजार में भी ऑटोमोबाइल और पेंट जैसे सेक्टरों पर दबाव देखने को मिल सकता है।





