अमेरिका और ईरान युद्ध से कच्चे तेल में ऐतिहासिक उछाल, क़तर ने दी 150 डॉलर प्रति बैरल की चेतावनी
अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल के बाज़ार में भारी उथल-पुथल मची है। खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुकने के डर से US oil futures में इस महीने 68 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो इतिहास की सबसे बड़ी मासिक तेज़ी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है और 24 घंटे में यहां से एक भी तेल का जहाज़ नहीं गुज़रा है। इस तनाव का सीधा असर आम लोगों की जेब और वैश्विक बाज़ार पर पड़ने लगा है।
क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम
इस्राइल ने सप्ताहांत में तेहरान की शाहरान ऑयल रिफाइनरी और कई तेल भंडारण टैंकों पर हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है और कट्टरपंथी मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा है। इन हालातों के कारण बाज़ार में घबराहट है।
- इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों ने अपना उत्पादन रोक दिया है क्योंकि निर्यात बंद होने से उनके स्टोरेज टैंक फुल हो चुके हैं।
- सात बड़ी बीमा कंपनियों ने इस इलाके से गुज़रने वाले जहाज़ों का वॉर रिस्क कवर (war risk coverage) रद्द कर दिया है, जिससे शिपिंग लगभग रुक गई है।
- पिछले हफ्ते WTI कच्चे तेल की कीमत में 35 प्रतिशत का उछाल आया था, जो 1983 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक तेज़ी है।
सोमवार की सुबह WTI कच्चे तेल का भाव 111.24 डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया और फिलहाल यह 107 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है। यह 1990 के खाड़ी युद्ध और 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से भी बड़ा उछाल है।
खाड़ी देशों और भारत पर क्या होगा असर
इस संकट का असर खाड़ी में काम करने वाले प्रवासियों और भारत जैसे तेल आयातक देशों पर गहराई से पड़ेगा। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि कुछ ही हफ्तों में तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, खाड़ी देशों के ऊर्जा निर्यातकों को सप्लाई रोकने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
- बाज़ार में तेल की कमी को देखते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने में कुछ अस्थायी छूट दी है ताकि दबाव कम हो सके।
- अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों में एक हफ्ते में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 3.45 डॉलर पर पहुंच गया है।
- शेयर बाज़ार में भी भारी गिरावट देखी गई है और Dow Jones रविवार रात 900 अंक से ज़्यादा टूट गया।
अमेरिकी सरकार फिलहाल अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) का इस्तेमाल नहीं कर रही है। हालांकि, बाज़ार की सट्टेबाजी को रोकने के लिए अमेरिका कुछ कड़े नियम लागू करने पर विचार कर रहा है। अमेरिका ने अपने जहाज़ों को ईरानी जलक्षेत्र से दूर रहने की एडवायज़री भी जारी की है।





