US-Israel War: साउथ कोरिया ने खड़े किए हाथ, सऊदी और UAE भेजे जा रहे अमेरिका के खतरनाक पैट्रियट मिसाइल
साउथ कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung ने मंगलवार को एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को साउथ कोरिया से निकालकर मिडिल ईस्ट भेज रहा है और वह इसे नहीं रोक सकते। यह मिसाइलें US-Israel और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के लिए भेजी जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन हथियारों को सऊदी अरब और UAE के अमेरिकी बेस पर तैनात किया जाएगा।
साउथ कोरिया सरकार ने इस कदम का विरोध किया है लेकिन अमेरिकी सेना की ‘स्ट्रैटेजिक फ्लेक्सिबिलिटी’ नीति के तहत अमेरिका अपने हथियारों को किसी भी युद्ध क्षेत्र में ले जाने के लिए स्वतंत्र है। इन मिसाइलों को Osan Air Base से बड़े अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान C-17 और C-5 के जरिए मिडिल ईस्ट के लिए रवाना किया जा रहा है।
सऊदी अरब और UAE क्यों भेजे जा रहे हैं हथियार?
अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 से ईरान के खिलाफ अपना नया ऑपरेशन शुरू किया है। इस युद्ध में अपनी और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए अमेरिका अपनी एयर डिफेंस प्रणाली को मजबूत कर रहा है।
- हथियारों का ट्रांसफर: पैट्रियट (MIM-104) मिसाइल और तोपखाने साउथ कोरिया से मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे हैं।
- संभावित ठिकाने: अमेरिका ने जगह नहीं बताई है, लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि ये मिसाइलें सऊदी अरब और UAE के अमेरिकी बेस पर जाएंगी।
- साउथ कोरिया की सुरक्षा: राष्ट्रपति Lee ने जनता को आश्वस्त किया है कि इससे नॉर्थ कोरिया के खिलाफ उनकी अपनी सैन्य ताकत पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके पास अपने आधुनिक हथियार मौजूद हैं।
गल्फ में रहने वाले प्रवासियों पर क्या असर पड़ेगा?
सऊदी अरब और UAE में काम करने वाले प्रवासियों के लिए यह एक अहम खबर है क्योंकि युद्ध का असर पूरे इलाके पर पड़ रहा है। अमेरिकी बेस पर सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।
- ट्रैवल एडवाइजरी: युद्ध को देखते हुए मिडिल ईस्ट के लिए लेवल 3 की चेतावनी जारी की गई है। नागरिकों से ईरान और आस-पास के इलाकों को तुरंत छोड़ने के लिए कहा गया है।
- पेट्रोल की कीमतें: युद्ध के कारण ऊर्जा बाजार पर असर पड़ रहा है। इसे देखते हुए साउथ कोरिया ने 9 मार्च को पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर एक सीमा तय कर दी है ताकि आम आदमी को महंगाई से बचाया जा सके।
- सुरक्षा की तैयारी: सऊदी और UAE में पैट्रियट मिसाइल तैनात होने से वहां रहने वाले लोगों और विदेशी कामगारों की हवाई सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।





