India Iran Relations: भारत ने ईरान के जंगी जहाज IRIS Lavan को कोच्चि में दी पनाह, विदेश मंत्री ने बताया इसे इंसानी फर्ज
ईरान ने अपने नौसेना के जहाज IRIS Lavan को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की इजाजत देने के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है। भारत ने यह फैसला पूरी तरह से मानवीय आधार पर लिया है। इस जहाज पर सवार क्रू मेंबर्स को भारतीय नौसेना की तरफ से मदद और ठहरने की जगह दी जा रही है। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने संसद में जानकारी दी कि इस मुश्किल वक्त में जहाज और उसके नाविकों की मदद करना एक सही कदम और मानवीय फैसला था।
ईरान के जहाज को भारत में क्यों रुकना पड़ा?
- यह जहाज इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और MILAN 2026 अभ्यास के लिए क्षेत्र में आया था।
- 28 फरवरी 2026 को तकनीकी और ऑपरेशनल समस्याओं के कारण ईरान ने भारत से तत्काल मदद मांगी।
- 1 मार्च 2026 को भारत सरकार ने इमरजेंसी और मानवीय आधार पर इसे कोच्चि में रुकने की मंजूरी दी।
- जहाज 4 मार्च 2026 को सुरक्षित रूप से कोच्चि पहुंच गया और मरम्मत के लिए अभी वहीं है।
- इसमें सवार 183 कर्मियों और युवा कैडेट्स को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया है।
दोनों देशों के बीच क्या बातचीत हुई?
इस पूरे मामले पर भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत हुई। भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने बताया कि समुद्र के कानून (UNCLOS) के तहत किसी भी संकट में फंसे जहाज की मदद करना अंतरराष्ट्रीय नियम है। उन्होंने संसद में कहा कि नाविक अचानक क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच फंस गए थे और उन्हें मदद की दरकार थी।
ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली और वहां के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस मदद के लिए भारत सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह भारत का एक बड़ा मानवीय दृष्टिकोण है जो दोनों देशों के पुराने और दोस्ताना संबंधों को सामने रखता है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि एक मददगार देश के रूप में सामने आई है।
अन्य ईरानी जहाजों का क्या हुआ?
इस समय समुद्र में काफी तनाव चल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उसी दिन ईरान का एक और जहाज IRIS Dena श्रीलंका के पास डूब गया था। इसी वजह से एक और ईरानी जहाज IRIS Bushehr को श्रीलंका के त्रिंकोमाली में मानवीय आधार पर रोका गया है। भारत ने बिना किसी विवाद में पड़े सिर्फ मानवीय नियमों का पालन करते हुए IRIS Lavan को मरम्मत और जरूरी रसद उपलब्ध कराई है।





