सऊदी, UAE और कुवैत का बड़ा फैसला, कच्चे तेल के उत्पादन में भारी कटौती, 100 डॉलर के पार पहुंचा भाव
सऊदी अरब, इराक, UAE और कुवैत ने मिलकर कच्चे तेल के उत्पादन में भारी कटौती का ऐलान किया है. ब्लूमबर्ग न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने के लिए लिया गया है. इस खबर के आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. खाड़ी देशों के इस कदम का असर पूरी दुनिया के साथ-साथ वहां काम करने वाले प्रवासियों और आम आदमी की जेब पर भी पड़ सकता है.
किस देश ने की कितनी कटौती?
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र में जहाजों की आवाजाही और स्टोरेज की समस्या के कारण कुल 6.2 मिलियन से 6.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन की सप्लाई रोकी गई है. इन चार देशों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| देश | उत्पादन में कटौती (प्रतिदिन) |
|---|---|
| सऊदी अरब | 2.0 से 2.5 मिलियन बैरल |
| इराक | करीब 2.9 मिलियन बैरल |
| UAE | 5 लाख से 8 लाख बैरल |
| कुवैत | 5 लाख से 6 लाख बैरल |
उत्पादन कम करने की मुख्य वजह क्या है?
अधिकारियों और रिसर्च के अनुसार, तेल जमा करने की क्षमता अब अपने अंतिम स्तर पर पहुंच रही है. खाड़ी देशों के पास अब केवल 100 मिलियन बैरल स्टोर करने की जगह बची है. इसके अलावा कुवैत और UAE ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर मंडराते खतरे को भी इसका एक बड़ा कारण बताया है. इस वजह से कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प और बहरीन की कंपनी ने फोर्स मेज्योर (Force Majeure) लागू करके एक्सपोर्ट को रोक दिया है.
दुनिया और आम आदमी पर क्या होगा असर?
बाजार में अचानक सप्लाई कम होने से Brent crude oil की कीमत में भारी उछाल आया है. बाजार में तेल की कमी को देखते हुए G7 देशों ने कहा है कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो वे अपने रिज़र्व से तेल निकालेंगे. भारत समेत दुनिया भर के देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमत सीधे कच्चे तेल से जुड़ी होती है. ऐसे में गल्फ देशों में रहने वाले भारतीय और भारत में रहने वाले आम नागरिक आने वाले समय में महंगाई के असर का सामना कर सकते हैं.





