US-Iran War Effect: अमेरिका और इजरायल के हमले से खाड़ी देशों में फ्लाइट्स ठप, भारत आने का किराया 900% बढ़ा
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के कारण मिडिल ईस्ट का एयरस्पेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस युद्ध के कारण 28 फरवरी 2026 से अब तक 27,000 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी हैं। खाड़ी देशों से होकर जाने वाले करीब 90 हजार ट्रांजिट यात्री हर दिन प्रभावित हो रहे हैं और हांगकांग से लेकर लंदन तक हजारों लोग एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं। स्थिति इतनी खराब है कि एशिया और यूरोप के बीच फ्लाइट के टिकट 900 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं।
खाड़ी देशों के एयरपोर्ट और एयरलाइंस का क्या हाल है?
मिडिल ईस्ट की कई एयरलाइंस ने अपनी सेवाएं बहुत सीमित कर दी हैं। जिन लोगों के पास कंफर्म टिकट है, केवल उन्हें ही एयरपोर्ट आने को कहा गया है।
- Air India: खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए 10 मार्च को 32 अतिरिक्त नॉन-शेड्यूल फ्लाइट्स चला रही है।
- Qatar Airways: 10 से 12 मार्च तक दोहा से कुछ खास रूट पर बहुत कम फ्लाइट्स उड़ेगी। स्टैंडबाय टिकट वाले यात्रियों को एयरपोर्ट आने से मना किया गया है।
- Etihad Airways: अबू धाबी से 19 मार्च तक सीमित संख्या में कमर्शियल फ्लाइट्स संचालित करेगा।
- Cathay Pacific: यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए लंदन और ज्यूरिख के लिए अतिरिक्त फ्लाइट्स जोड़ रही है।
टिकट के दाम और फ्लाइट के रूट में क्या बदलाव हुए?
ईरान, इराक, इजरायल, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और UAE के ऊपर का एयरस्पेस सुरक्षा कारणों से बंद या काफी प्रतिबंधित है। इसके कारण फ्लाइट्स को काकेशस और अफगानिस्तान या सऊदी अरब और ओमान के ऊपर से डायवर्ट किया जा रहा है। इस बदलाव से यात्रा का समय 2 से 4 घंटे बढ़ गया है।
एविएशन फ्यूल की कीमत भी 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है जिसके चलते भारतीय एयरलाइंस को रोजाना 150 से 200 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। टिकट के दामों की बात करें, तो लंदन से मुंबई का इकोनॉमी टिकट 3,450 डॉलर और बिजनेस क्लास 10,700 डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं लंदन से सिंगापुर का वन-वे टिकट 8,100 डॉलर में बिक रहा है।
क्या यह युद्ध लंबा चलेगा?
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि 10 मार्च को ईरान के अंदर सबसे तेज हमले किए जाएंगे। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनुमान जताया है कि यह संघर्ष 4 से 5 सप्ताह तक चल सकता है, लेकिन अमेरिका इसे और लंबा खींचने में भी सक्षम है। एयरस्पेस बंद होने और लगातार हमलों के कारण ग्लोबल कनेक्टिविटी और एयरलाइंस की कमाई पर भारी असर पड़ रहा है।




