अमेरिका-ईरान युद्ध पर संसद में हंगामा, 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद व्हाइट हाउस से जवाब तलब
अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए Operation Epic Fury को लेकर अमेरिका की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। डेमोक्रेट्स सांसदों ने व्हाइट हाउस पर आरोप लगाया है कि सरकार ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि यह युद्ध क्यों शुरू हुआ और इसके लक्ष्य क्या हैं। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में अब तक 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 140 से ज्यादा घायल हुए हैं। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों के लिए तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव एक बड़ी चिंता बन गया है।
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युद्ध के अब तक के हालात और बड़ा नुकसान
पेंटागन और आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक युद्ध शुरू हुए 11 दिन बीत चुके हैं। इस दौरान अमेरिका और ईरान दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। डेमोक्रेट सांसदों ने ईरान के Minab शहर में एक स्कूल पर हुए हमले की जांच की मांग की है जहां करीब 170 लोगों की जान चली गई है। खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह तनाव सुरक्षा और आर्थिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है।
| मुख्य विवरण | ताजा आंकड़े |
|---|---|
| अमेरिकी सैनिक हताहत | 7 मृत, 140 घायल |
| आम नागरिक मौतें (Minab हमला) | 170 लगभग |
| तेल की अधिकतम कीमत | 119 डॉलर प्रति बैरल |
| युद्ध का अनुमानित समय | 4 से 6 हफ्ते |
व्हाइट हाउस की रणनीति और सांसदों का विरोध
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt का कहना है कि सरकार का लक्ष्य ईरान के मिसाइल उद्योग और परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। हालांकि Senator Chris Murphy और Elizabeth Warren जैसे नेताओं ने इस रणनीति को पूरी तरह गलत बताया है। सांसदों का कहना है कि सरकार हर दिन एक अरब डॉलर युद्ध पर खर्च कर रही है जबकि देश के अंदर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति खराब है। संसद में अब War Powers Act के तहत वोटिंग कराने की तैयारी चल रही है ताकि इस युद्ध को रोका जा सके।
खाड़ी देशों और बाज़ार पर क्या होगा असर
ईरान द्वारा Strait of Hormuz बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया था। तेल की कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं जो अब घटकर 90 डॉलर के नीचे आई हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि युद्ध लंबा खिंचने पर फ्लाइट टिकटों के दाम और ज़रूरी सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत से खाड़ी देशों की यात्रा करने वालों को भी आने वाले दिनों में नए नियमों का सामना करना पड़ सकता है।





