खाड़ी देशों में न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी, भारत से मंगाई जा रही 1 करोड़ खास दवाइयां
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों ने न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए एक बहरीन स्थित एजेंट ने चंडीगढ़ की एक फार्मा कंपनी से 1 करोड़ Prussian Blue कैप्सूल बनाने के लिए संपर्क किया है। यह दवा परमाणु विकिरण यानी रेडिएशन के संपर्क में आने वाले लोगों के इलाज में काम आती है। मार्च 2026 में उपजे ताजा हालातों को देखते हुए भारत सरकार इन ऑर्डर्स को रणनीतिक निर्यात के तौर पर देख रही है।
दवाओं की मांग और इनकी खासियत
खाड़ी देशों की ओर से भारत को दवाओं का बड़ा ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। इसमें रेडिएशन से बचाव के लिए जरूरी दो प्रमुख दवाएं शामिल हैं। Prussian Blue शरीर के अंदर पहुंचे रेडियोधर्मी तत्वों जैसे सीज़ियम-137 और थैलियम को मल के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। वहीं Potassium Iodide की गोलियां रेडिएशन के दौरान थायराइड ग्रंथि को नुकसान पहुंचने से बचाती हैं। इन दवाओं की मांग की मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
| दवा का नाम | मांग (संख्या) | मुख्य काम |
|---|---|---|
| Prussian Blue Capsules | 1 करोड़ यूनिट | शरीर से रेडिएशन फ्लश करना |
| Potassium Iodide Tablets | 1.2 करोड़ यूनिट | थायराइड ग्रंथि का बचाव |
भारतीय तकनीक और निर्यात की योजना
इन दवाओं को तैयार करने की तकनीक DRDO के INMAS संस्थान ने विकसित की है। भारत में चंडीगढ़ की Scott-Edil Pharmacia और अहमदाबाद की Skanttr Lifescience के पास इन्हें बनाने और बेचने का लाइसेंस है। भारतीय दवाएं पश्चिमी देशों के मुकाबले काफी सस्ती हैं, जिससे इनकी मांग बढ़ी है। तनावपूर्ण हालातों के कारण इन दवाओं को समुद्र के बजाय ओमान के Duqm पोर्ट या एयर कार्गो के जरिए भेजने पर बातचीत चल रही है। इन दवाओं की सप्लाई के लिए अब स्वास्थ्य और विदेश मंत्रालय से जरूरी मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।





