France Oil Reserve: फ्रांस और G7 देशों का बड़ा फैसला, तेल की कीमत कम करने के लिए निकाला करोड़ों बैरल रिजर्व
फ्रांस और G7 देशों ने मिलकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। दुनिया भर में तेल की कीमतों को कम करने और सप्लाई बनाए रखने के लिए फ्रांस अपने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व का इस्तेमाल करने जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने के कारण तेल की ग्लोबल सप्लाई में भारी कमी आई थी। इसके बाद इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के साथ मिलकर यह फैसला लिया गया है ताकि आम लोगों और दुनिया भर के मार्केट को महंगे तेल से बचाया जा सके।
यह फैसला क्यों लिया गया और इसका क्या असर होगा
- Strait of Hormuz बंद होने के कारण दुनिया भर में हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल की कमी हो गई थी।
- इस खबर के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत 119-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
- अब फ्रांस और G7 के इस बड़े कदम के बाद कीमत गिरकर 87-89 डॉलर के करीब आ गई है।
- IEA के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी राहत है, जिसमें 300 से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारा जाएगा।
फ्रांस और अन्य देशों की इसमें क्या भूमिका है
फ्रांस इस समय G7 देशों की अध्यक्षता कर रहा है। फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने साफ किया है कि इस हालात से निपटने के लिए सभी देश मिलकर काम कर रहे हैं। IEA के नियमों के अनुसार सदस्य देशों को अपना रिजर्व बाजार में उतारने के लिए 90 दिनों का समय मिलता है। फ्रांस के पास भी नियम के तहत 90 दिन के आयात जितना रिजर्व मौजूद है। अमेरिका, कनाडा, जापान, इटली, यूके और जर्मनी भी इस मुश्किल समय में सप्लाई ठीक करने के लिए साथ आ रहे हैं। इस फैसले से गल्फ देशों में रहने वाले और भारत आने-जाने वाले प्रवासियों को भी तेल की कीमतों में स्थिरता से अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी राहत मिलेगी।




