Iran Supreme Leader Order: ईरान के सुप्रीम लीडर का नया फरमान, दुश्मनों और सहयोगियों की संपत्ति होगी जब्त
ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई अब तय है। अगर कोई इसका विरोध करता है या दुश्मनों का साथ देता है, तो ईरान सरकार उनकी संपत्ति जब्त कर लेगी। अगर संपत्ति जब्त करना संभव नहीं हुआ, तो उतनी ही कीमत की संपत्ति को तबाह कर दिया जाएगा। यह जानकारी ईरान की आधिकारिक न्यूज़ एजेंसी IRNA ने 12 मार्च 2026 को दी है।
विदेशों में रहने वाले लोगों और आम जनता पर असर
इस नए नियम का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो विदेशों में रहते हैं और विदेशी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं। ईरान के बाहर रहने वाले लाखों लोगों को चेतावनी दी गई है कि अगर वे अमेरिका या इजरायल का साथ देते हैं, तो देश के अंदर उनकी संपत्ति तुरंत जब्त कर ली जाएगी।
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में रहने वाले आम लोगों और प्रवासियों के लिए भी एक अलर्ट जारी हुआ है। सेना ने लोगों से अपील की है कि वे अमेरिका और इजरायल के Bank या वित्तीय संस्थाओं से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहें। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीयों और प्रवासियों को भी अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना होगा।
सेना की तैयारी और नया कानून
इस आदेश को लागू करने के लिए न्यायपालिका ने कड़े नियम बनाए हैं। जासूसी और सहयोग से जुड़े नए कानून के तहत संपत्ति छीनने का अधिकार दिया गया है। दूसरी तरफ, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रू प्रॉमिस नाम से अपना ऑपरेशन तेज कर दिया है।
सेना ने यह भी कहा है कि अगर ईरान के किसी भी Port पर हमला हुआ, तो वे मिडिल ईस्ट के सभी क्षेत्रीय Port और डॉक को निशाना बनाएंगे। जलडमरूमध्य में पहले ही कुछ जहाजों पर सैन्य कार्रवाई की जा चुकी है जो चेतावनियों का उल्लंघन कर रहे थे।
युद्ध का प्रभाव और राष्ट्रपति की मांग
इस संघर्ष की वजह से ईरान के अंदर हालात काफी खराब हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार करीब 3.2 मिलियन लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कहा है कि इस लड़ाई को तभी रोका जा सकता है जब उनके देश के अधिकारों को माना जाए।
उन्होंने अमेरिका और इजरायल से नुकसान की भरपाई की भी मांग की है। दोनों तरफ से लगातार हो रही इस बयानबाजी और कार्रवाई के कारण मिडिल ईस्ट का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।





