US Iran War: अमेरिका ने पहली बार ब्रिटेन के बेस से ईरान पर किया हमला, 3 घातक बॉम्बर एयरबेस लौटे
अमेरिका और इस्राइल के साथ चल रहे ईरान के युद्ध में एक नया मोड़ सामने आया है। 12 मार्च 2026 को अमेरिका के तीन B-1B Lancer बॉम्बर ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस पर वापस उतरे हैं। ये बॉम्बर ईरान पर सीधा हमला करने के मिशन के बाद वापस आए हैं। यह पहली बार है जब अमेरिका ने ईरान पर एयर स्ट्राइक के लिए ब्रिटेन के किसी बेस का इस्तेमाल किया है।
ब्रिटेन के बेस से हमले की वजह
अमेरिकी सेना पहले अमेरिका से ही उड़ान भरती थी, जिसमें उन्हें 37 घंटे का लंबा समय लगता था। ब्रिटेन के एयरबेस का इस्तेमाल करने से यह समय आधे से भी कम हो गया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने 1 मार्च 2026 को अमेरिका को अपने RAF Fairford बेस को इस्तेमाल करने की मंजूरी दी थी। इस बेस पर अभी 5 B-1B Lancer और 3 B-52H बॉम्बर मौजूद हैं। अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने बताया कि इन हमलों का मकसद ईरान के मिसाइल सिस्टम और कमांड सेंटरों को शुरुआत में ही खत्म करना है।
खाड़ी देशों में रहने वालों पर असर
इस युद्ध का असर अब खाड़ी देशों पर भी देखने को मिल रहा है। ईरान ने पलटवार करते हुए Strait of Hormuz में पानी के जहाजों को निशाना बनाया है। इसके साथ ही यूएई, बहरीन, सऊदी अरब और कुवैत की तरफ भी ईरान की ओर से प्रोजेक्टाइल दागे गए हैं। इससे इन देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए सतर्क रहने की स्थिति बन गई है। ईरान के नेता Ayatollah Mojtaba Khamenei ने बयान दिया है कि वे Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ मजबूत रखेंगे।
युद्ध से जुड़े मुख्य आंकड़े
अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य अभियान के कुछ आंकड़े और स्थिति स्पष्ट की है।
- 28 फरवरी से अब तक अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के करीब 6,000 ठिकानों पर हमला किया है।
- युद्ध की वजह से ईरान के अंदर लगभग 3.2 मिलियन लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
- ब्रिटेन की सेना सिर्फ बचाव के लिए काम कर रही है, जबकि अमेरिका ब्रिटेन की जमीन से आक्रामक हमले कर रहा है।
- युद्ध के कारण दुनिया भर के शेयर बाजार में गिरावट आई है, 12 मार्च को S&P 500 इंडेक्स 1.4% गिर गया।




