युद्ध के बीच ईरान का बड़ा खेल: 9 दिन में बेचा 137 लाख बैरल तेल, चीन बना सबसे बड़ा खरीदार
अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बावजूद ईरान ने अपने तेल का व्यापार जारी रखा है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस युद्ध के पहले 9 दिनों में ईरान ने हर दिन 10 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल निर्यात किया है। CBS न्यूज़ और सऊदी न्यूज़ 50 की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने इन दिनों में करीब 1.37 करोड़ (13.7 मिलियन) बैरल तेल बेचा है। इस दौरान सबसे ज्यादा कच्चे तेल की डिलीवरी अकेले चीन को की गई है।
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ईरान कैसे कर रहा है भारी मात्रा में तेल का निर्यात?
ईरान इस युद्ध के बीच एक खास शैडो फ्लीट (shadow fleet) का इस्तेमाल कर रहा है। ये वो जहाज हैं जिन पर पहले से पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लगे हुए हैं। इन जहाजों के जरिए ही क्रूड ऑयल को सुरक्षित रूप से चीन और अन्य जगहों पर भेजा जा रहा है। 11 मार्च तक के डेटा के अनुसार ईरान ने लगभग 1.18 करोड़ बैरल तेल सिर्फ चीन को डिलीवर किया है।
ईरानी टैंकर विदेशी सेना की पकड़ में आने से बचने के लिए ईरान के 24 मील के समुद्री इलाके (EEZ) के भीतर ही सफर कर रहे हैं। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को आम इंटरनेशनल जहाजों के लिए लगभग बंद मान लिया गया है। वहां इंश्योरेंस का खर्च और सुरक्षा का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है, हालांकि ईरान के जहाज अभी भी वहां से गुजर रहे हैं।
इस बीच अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने होर्मुज के पास ईरान की 16 माइनलेयर नावों को नष्ट कर दिया है ताकि समुद्री रास्ते को पूरी तरह से बंद होने से रोका जा सके।
बाजार में तेल की कीमतों और खाड़ी देशों पर क्या असर पड़ा?
युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर भारी दबाव है। 9 मार्च 2026 को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि बाद में अमेरिका के बयानों के बाद ये कीमत 90 से 100 डॉलर के बीच आ गई। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें कुछ ही दिनों में 17 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
ईरान के सैन्य अधिकारियों ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर ये युद्ध और फैला तो बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा ऑयल सप्लाई शॉक है।
इस युद्ध के कारण खाड़ी देशों के तेल व्यापार पर भी सीधा असर पड़ा है। इराक, कुवैत और यूएई (UAE) को अपना तेल उत्पादन कम करना पड़ा है क्योंकि उनके स्टोरेज फुल हो गए हैं और एक्सपोर्ट के रास्ते बंद हैं। वहीं ईरान लगातार अपना पुराना स्टॉक शैडो फ्लीट के जरिए खाली कर रहा है।




