US Iran Conflict: ट्रंप का ऐलान, ईरान पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला, 51 जहाज डूबे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 मार्च 2026 को एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर एक ऐसी ताकत से हमला कर रहा है जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से किसी ने नहीं देखी है. इस सैन्य अभियान को ऑपरेशन एपिक फरी (Operation Epic Fury) का नाम दिया गया है जिसका मकसद ईरान की सेना का बिना शर्त आत्मसमर्पण करवाना है.
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ईरान की नौसेना को भारी नुकसान
अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है. अब तक लगभग 51 ईरानी समुद्री जहाजों को डुबाया जा चुका है. यह भी सामने आया है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अमेरिकी नेवी की पनडुब्बी ने टॉरपीडो से किसी जहाज को निशाना बनाया है. अमेरिकी वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं होते, तब तक सेना का यह अभियान जारी रहेगा.
तेल बाजार और खाड़ी देशों पर असर
इस संघर्ष के कारण ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद रखने का आदेश दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो वह क्षेत्र के तेल और गैस को आग लगा देंगे. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने तेल सप्लाई में भारी रुकावट की आशंका जताई है. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए कहा कि कच्चे तेल की कीमतों से ज्यादा जरूरी ईरान पर लगाम लगाना है. गल्फ में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले यात्रियों पर इस तनाव का असर पड़ सकता है क्योंकि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है.
अमेरिका के पास अब टारगेट खत्म
ट्रंप ने मीडिया को बताया कि अमेरिकी सेना के पास अब ईरान में हमले के लिए बहुत कम जगह बची हैं. ईरान के मिसाइल कारखाने और परमाणु ठिकानों को लगभग पूरी तरह नष्ट किया जा चुका है. दूसरी तरफ ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर अमेरिका को चेतावनी दी है कि इस युद्ध को शुरू करना आसान था लेकिन इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. फिलहाल अमेरिका की ओर से किसी भी तरह के शांति समझौते से साफ इनकार किया गया है.





