खाड़ी देशों में संकट से भारत में LPG गैस की किल्लत, सिलेंडर 60 रुपये महंगा हुआ
खाड़ी क्षेत्र के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहे तनाव के कारण एलपीजी (LPG) गैस की सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। टाइम्स ऑफ ओमान और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की 13 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार इस रास्ते से हर दिन 1.5 मिलियन बैरल गैस की सप्लाई रुक गई है। इसका सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ रहा है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत गैस इसी रास्ते से आयात करता है।
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भारत में सिलेंडर के दाम और गैस सप्लाई पर असर
भारत सरकार ने इस संकट को देखते हुए कई जरूरी कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर माना है कि गैस पहुंचने में देरी हो रही है और लोगों ने डर से गैस की एडवांस बुकिंग शुरू कर दी है। इसके कारण रसोई गैस के दाम में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने 6 मार्च को ESMA कानून लागू कर दिया है। इसके तहत रिफाइनरी कंपनियों को पेट्रोकेमिकल बनाने के बजाय सिर्फ घरेलू कुकिंग गैस बनाने का आदेश दिया गया है।
वर्तमान में गैस की सप्लाई को लेकर नए नियम भी बनाए गए हैं। अब घरों, अस्पतालों और खाद कारखानों को गैस देने में प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है ताकि आम लोगों को गैस की कमी का सामना ना करना पड़े।
ओमान और अन्य खाड़ी देशों की स्थिति
इस पूरे संकट में ओमान की स्थिति अन्य देशों के मुकाबले काफी सुरक्षित है। S&P ग्लोबल और मूडीज जैसी रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक ओमान के मुख्य एक्सपोर्ट टर्मिनल सोहार और डुकम होर्मुज से बाहर हैं। लेकिन कतर, यूएई, सऊदी अरब और कुवैत जैसे बड़े देशों की सप्लाई फिलहाल फंसी हुई है। कतर एनर्जी और कई शिपिंग कंपनियों ने फोर्स मेज्योर (Force Majeure) लागू कर दिया है क्योंकि पानी के रास्तों में खतरे बढ़ गए हैं। दुनिया भर का 29 प्रतिशत एलपीजी सिर्फ इसी रास्ते से गुजरता है।
अमेरिका से गैस मंगाने का विकल्प कितना आसान
खाड़ी देशों से भारत और एशियाई मार्केट तक गैस पहुंचने में एक हफ्ते से भी कम समय लगता है। अब सप्लाई रुकने के कारण अमेरिका जैसे देशों से गैस मंगाने पर विचार हो रहा है। लेकिन वहां से भारत तक गैस पहुंचने में कम से कम 5 से 6 हफ्ते का समय लगता है। IEA और जानकारों का कहना है कि एलपीजी के लिए क्रूड ऑयल की तरह कोई बाईपास पाइपलाइन मौजूद नहीं है। इसी वजह से मौजूदा समय में सप्लाई चेन को ठीक करने में भारी दिक्कतें आ रही हैं।





