ईरान में मिसाइल हमले से मेडिकल वेयरहाउस खाक, 1230 लोगों की मौत और तेल के दाम 119 डॉलर के पार
ईरान की न्यूज़ एजेंसी IRNA की 13 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार एक बड़ा मेडिकल वेयरहाउस मिसाइल हमले का शिकार हो गया है। इस हमले में मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं और बच्चों का बेबी फॉर्मूला पूरी तरह जलकर खाक हो गया। अधिकारियों ने बताया कि यह हमला मिसाइलों द्वारा किया गया था। इस घटना के बाद से मरीजों के लिए जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी हो गई है।
हमले का स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर
वेयरहाउस तबाह होने से स्वास्थ्य क्षेत्र पर सीधा प्रभाव पड़ा है। इस घटना और इसके असर से जुड़ी कुछ अहम बातें नीचे दी गई हैं:
- वेयरहाउस में रखी सभी जरूरी दवाएं और बच्चों का दूध जलकर राख हो गया है।
- WHO ने दुबई में अपना ग्लोबल इमरजेंसी लॉजिस्टिक हब ट्रांसपोर्टेशन में हो रही दिक्कत के कारण फिलहाल बंद कर दिया है।
- 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस तनाव में अब तक 1230 नागरिकों की जान जा चुकी है।
- गांधी होटल अस्पताल सहित 10 अस्पतालों और एंबुलेंस सेंटरों को भी नुकसान पहुंचा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चिंता जताई है कि दुबई से सप्लाई चेन रुकने के कारण अब नई दवाएं मंगाना काफी मुश्किल हो गया है। सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है जिनके घर या व्यापार को नुकसान पहुंचा है।
कच्चे तेल की कीमत और आर्थिक हालात
इस संघर्ष का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है बल्कि ग्लोबल स्तर पर भी देखा जा रहा है। नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद रखने का फैसला लिया है।
- कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 119.48 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।
- ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो तेल की कीमत 200 डॉलर तक पहुंच सकती है।
- बड़े शहरों में बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा कम होने और कैश की कमी के कारण लोगों को राशन में ब्रेड दी जा रही है।
इन हालातों का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सीधा महंगाई से जुड़ा होता है। हवाई यात्राएं और लॉजिस्टिक भी प्रभावित हो रहे हैं।




