ईरान के राष्ट्रपति का बड़ा बयान, ‘अमेरिका और Israel इस्लामिक देशों को तोड़ना चाहते हैं’, खाड़ी में बढ़ा तनाव
ईरान और इज़रायल के बीच चल रहे तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने एक बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और ज़ायोनी शासन (Israel) की मंशा ईरान और अन्य बड़े इस्लामिक देशों को कमजोर करके उन्हें तोड़ने की है। IRNA न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील की है।
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युद्ध के 14 दिन पूरे, खाड़ी देशों में क्या हैं हालात
आज 13 मार्च 2026 को ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच चल रहे इस युद्ध को 14 दिन पूरे हो गए हैं। इस दौरान लगातार सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई देखने को मिल रही है।
ईरान की सेना IRGC ने ऐलान किया है कि उन्होंने हिजबुल्लाह के साथ मिलकर इज़रायल पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। यह कार्रवाई कुद्स डे (Quds Day) के मौके पर की गई।
ईरान के अधिकारियों का कहना है कि वे किसी तरह का लंबा युद्ध नहीं चाहते हैं, लेकिन अगर उनके किसी पड़ोसी क्षेत्र से उन पर हमला होता है, तो वे अपना बचाव जरूर करेंगे।
आम लोगों और Oil Market पर इसका क्या असर पड़ रहा है
इस बढ़ते तनाव का सीधा असर पूरी दुनिया और खासकर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर पड़ रहा है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में व्यापार और आवाजाही काफी प्रभावित हुई है।
भारत में ईरान के प्रतिनिधि ने साफ किया है कि Strait of Hormuz को आधिकारिक तौर पर बंद नहीं किया गया है। हालांकि, मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि वहां से व्यापारिक जहाजों का गुजरना बहुत मुश्किल हो गया है।
समुद्री रास्तों में रुकावट की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है।
इंटरनेट बंद और आम जनता की सुरक्षा पर अलर्ट
युद्ध और लगातार हमलों के कारण ईरान और आसपास के खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। हवा में रोके गए मिसाइल और ड्रोन के मलबे से आम लोगों की जान को खतरा बना हुआ है, जिसके लिए सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है।
वहीं, ईरान के अंदर कई जगहों पर इंटरनेट सेवा पूरी तरह से बंद (Internet blackouts) कर दी गई है। प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों को रोकने के लिए ऐसा कर रहा है।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से भी अपील की है कि वे आम नागरिकों के घरों और बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं।




