अमेरिका ने 2200 सैनिकों को भेजा Middle East, सऊदी और गल्फ देशों के हवाई क्षेत्रों पर असर
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपने 2200 मरीन सैनिकों (U.S. Marines) की एक टुकड़ी को भेजा है. ABC न्यूज़ और सऊदी न्यूज़ 50 के आधिकारिक अपडेट के अनुसार 13 मार्च 2026 को इस सैन्य मूवमेंट की पुष्टि की गई है. इन सैनिकों को लाल सागर (Red Sea) और भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) के आस-पास तैनात किया जा रहा है. गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और यात्रियों के लिए यह एक अहम खबर है क्योंकि इस तैनाती के कारण सऊदी अरब और कतर सहित कई देशों के हवाई क्षेत्रों (Airspace) में पाबंदियां लगाई जा रही हैं.
यह सेना मिडिल ईस्ट में क्यों आ रही है
पेंटागन के अनुसार इस मिशन को “ऑपरेशन एपिक फरी” (Operation Epic Fury) के तहत चलाया जा रहा है. इस तैनाती का मुख्य मकसद समुद्री रास्तों, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करना और कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा देना है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन सैनिकों को सीधे युद्ध का आदेश नहीं मिला है. यह टुकड़ी “Prepare to Deploy” मोड में है, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी आपातकालीन स्थिति में 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
कौन से युद्धपोत और अधिकारी हैं इस मिशन में शामिल
इस सैन्य मिशन में 26वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) के सैनिक शामिल हैं. यह सैनिक तीन बड़े नेवी जहाजों पर सवार होकर अपनी जगहों पर पहुंच रहे हैं.
- USS Bataan और USS Carter Hall: ये दोनों युद्धपोत लाल सागर (Red Sea) की तरफ बढ़ रहे हैं.
- USS Mesa Verde: स्पेन में मेंटेनेंस के बाद इसे भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में तैनात किया गया है.
- कमांड: यह पूरी तैयारी U.S. Central Command (CENTCOM) के एडमिरल ब्रैड कूपर की देखरेख में हो रही है.
गल्फ में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों पर असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ड्रोन तथा मिसाइल के खतरों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. इस सैन्य तैनाती के बीच सऊदी अरब, बहरीन, कतर और कुवैत जैसे देशों में हवाई क्षेत्र (Airspace) को लेकर कई तरह के प्रतिबंध देखने को मिल रहे हैं. अगर आप गल्फ देशों में रहते हैं या भारत से वहां यात्रा करने वाले हैं, तो आपकी फ्लाइट्स के शेड्यूल पर इसका असर पड़ सकता है. सुरक्षा कारणों से लिए गए इस फैसले के कारण यात्रियों को हवाई यात्रा के दौरान नई गाइडलाइंस का सामना करना पड़ सकता है.




