Iran Crisis Update: ईरान के पूर्व शाह के बेटे Reza Pahlavi ने किया बड़ा ऐलान, सत्ता गिरने के बाद खुद संभालेंगे नई सरकार
ईरान में मौजूदा सत्ता के गिरने की सुगबुगाहट के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के पूर्व शाह के बेटे रेजा पहलवी (Reza Pahlavi) ने ऐलान किया है कि अगर मौजूदा सरकार गिरती है, तो वह तुरंत एक ‘ट्रांजिशनल सिस्टम’ यानी अस्थायी सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। यह जानकारी 14 मार्च 2026 को सऊदी की प्रमुख न्यूज़ एजेंसी SaudiNews50 के हवाले से सामने आई है। इस खबर के बाद से पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल मच गई है।
ईरान में क्या है नया ट्रांजिशन प्लान?
रेजा पहलवी की टीम पिछले कई महीनों से ईरान के अंदर और बाहर दोनों जगह काबिल लोगों की तलाश कर रही है। इस प्लान को ‘Iran Prosperity Project’ का नाम दिया गया है। इसके तहत अगर मौजूदा सरकार गिरती है तो एक खास रोडमैप तैयार किया गया है जिसे तुरंत लागू किया जाएगा।
- शुरुआती 180 दिनों तक एक इमरजेंसी व्यवस्था रहेगी जिसमें देश की सुरक्षा, सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और खाने-पीने की सप्लाई जारी रखी जाएगी।
- चौथे महीने में पूरे देश में वोटिंग कराई जाएगी ताकि आम लोग यह चुन सकें कि उन्हें देश में राजशाही चाहिए या रिपब्लिक सिस्टम।
- छठे महीने में एक नई असेंबली बनाई जाएगी जो देश का नया संविधान लिखेगी।
- यह पूरी प्रक्रिया 18 से 24 महीनों में पूरी की जाएगी जिसके बाद यह अस्थायी सरकार अपने आप खत्म हो जाएगी।
ईरान में अभी कैसे हैं हालात और गिरफ्तारियां
ईरान के अंदर के हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के हमले में सुप्रीम लीडर अली खामनेई की मौत की खबर आई थी। इसके बाद से उनका उत्तराधिकारी मुजतबा खामनेई भी आम जनता के सामने नहीं आया है जिसके कारण देश में लीडरशिप की जगह खाली नजर आ रही है। इस बीच ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया है कि रेजा पहलवी के 54 समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों पर देश में दंगे भड़काने और विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने का आरोप लगाया गया है।
अरब देशों और अर्थव्यवस्था पर इसका असर
रेजा पहलवी ने सऊदी अरब, यूएई (UAE) और बहरीन जैसे प्रमुख अरब देशों से भी अपील की है। उन्होंने कहा है कि अरब देशों को इस नई अस्थायी सरकार के साथ काम करने के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए ताकि भविष्य में दोनों के बीच आपसी सम्मान और व्यापारिक संबंध बन सकें। इसके साथ ही नए प्लान में ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था को सुधारने का भी लक्ष्य रखा गया है। अभी के समय में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 9 लाख 29 हजार ईरानी रियाल तक पहुंच गई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी ईरान के हालात पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि इसका सीधा असर मिडिल ईस्ट की शांति, फ्लाइट्स के रूट और ओवरऑल कारोबार पर पड़ता है।




