European Union का बड़ा फैसला, Strait of Hormuz में नहीं जाएगी सेना, व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर हुई मीटिंग
यूरोपीय यूनियन (EU) के विदेश मंत्रियों की सोमवार, 16 मार्च 2026 को ब्रुसेल्स में एक अहम बैठक हो रही है। इस मीटिंग का मुख्य मकसद मिडिल ईस्ट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए चल रहे ‘Operation Aspides’ को और मजबूत करना है। अमेरिका के दबाव के बावजूद EU ने Strait of Hormuz में अपना नेवल मिशन भेजने से इनकार कर दिया है।
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Operation Aspides क्या है और इसका नया बजट कितना है
यह यूरोपीय यूनियन का एक डिफेंसिव मिशन है। इसका मुख्य काम लाल सागर (Red Sea) और अरब सागर में गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाना है।
- मिशन का नाम: Operation Aspides
- नया एक्सटेंशन: इसे 28 फरवरी 2027 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
- बजट: 1 मार्च 2026 से अगले एक साल के लिए लगभग 15 मिलियन यूरो का बजट रखा गया है।
- मिशन का दायरा: यह मिशन Red Sea, Gulf of Aden, Arabian Sea और Gulf of Oman में काम करेगा।
इस मिशन के तहत सेना केवल बचाव का काम करेगी। किसी भी देश के जमीन पर जाकर हमला करने की सख्त मनाही है। कमर्शियल जहाजों की तरफ से सुरक्षा की मांग बढ़ने के कारण मीटिंग में सदस्य देशों से और अधिक नेवल शिप देने की मांग की जा रही है।
Strait of Hormuz में सेना भेजने से क्यों किया गया इनकार
Strait of Hormuz दुनिया के व्यापार के लिए एक बहुत अहम रास्ता है। ग्लोबल समुद्री रास्ते से जाने वाले कुल ऑयल (Oil) और LNG का 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण यह रास्ता लगभग बंद पड़ा है।
अमेरिका इस रास्ते को फिर से खोलने के लिए यूरोपीय देशों, जापान और ऑस्ट्रेलिया पर एक साथ मिलकर सेना भेजने का दबाव बना रहा है। लेकिन जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने अपने युद्धपोत वहां भेजने से साफ मना कर दिया है।
जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने कहा कि वह इस विवाद का सीधा हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं। वहीं EU की फॉरेन पॉलिसी चीफ Kaja Kallas ने भी साफ किया कि वह किसी नए युद्ध क्षेत्र में शामिल होने के बजाय मौजूदा मिशन में और जहाजों को जोड़ने पर ध्यान दे रहे हैं।




