Middle East जंग में नहीं कूदेगा UK: PM Keir Starmer का ऐलान, ट्रंप की चेतावनी के बाद युद्धपोत भेजने से किया मना
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा। ईरान के साथ चल रहे इस विवाद के तीसरे हफ्ते में प्रवेश करने के बाद यह बयान काफी अहम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन और अन्य देशों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने इस क्षेत्र में सैन्य मदद नहीं दी तो NATO का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। ब्रिटेन ने फिलहाल युद्ध को भड़काने वाले कदम उठाने से परहेज किया है।
ट्रंप की चेतावनी और UK का जवाब
डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर सहयोगी देश Strait of Hormuz को खोलने में मदद नहीं करते हैं, तो यह NATO के लिए बहुत बुरा होगा। उन्होंने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया को धीमा बताया था। लेकिन ब्रिटेन के पीएम Starmer ने ट्रंप की मांग को दरकिनार करते हुए Royal Navy के युद्धपोत भेजने से सीधे तौर पर मना कर दिया है। उनका कहना है कि वह एक सामूहिक और व्यवहारिक योजना पर काम करेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन अब सीधे युद्ध से बचने के लिए वहां बड़े युद्धपोत की जगह माइन-हंटिंग ड्रोन (mine-hunting drones) भेजने पर विचार कर रहा है। इसके जरिए तकनीकी मदद दी जाएगी जिससे विवाद न बढ़े। पीएम Starmer ने साफ कहा कि वह अपने लोगों की सुरक्षा सबसे पहले करेंगे और किसी बड़ी जंग का हिस्सा नहीं बनेंगे।
अन्य देशों का रुख और तेल की कीमतों पर असर
फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों ने भी अपने जहाज मिडिल ईस्ट भेजने से मना कर दिया है। जर्मनी के अधिकारियों ने कहा है कि यह NATO का युद्ध नहीं है क्योंकि इसका काम सदस्य देशों की रक्षा करना है, न कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर पुलिसिंग करना। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन इस समय ट्रंप के साथ रिश्ते और क्षेत्रीय युद्ध से बचने के बीच कूटनीतिक संतुलन बना रहा है।
इस युद्ध का सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है और यह 104-105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। इसके असर से बचने के लिए ब्रिटेन के पीएम ने ग्रामीण इलाकों में हीटिंग ऑयल की लागत में मदद के लिए 53 मिलियन पाउंड के फंड की घोषणा की है।




