Hormuz Crisis: यूरोप ने ठुकराई ट्रंप की मांग, युद्धपोत भेजने से किया मना, 105 डॉलर पहुंचा कच्चा तेल
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यूरोपीय देशों से बड़ा झटका लगा है। जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अपने युद्धपोत भेजने से साफ इनकार कर दिया है। ट्रंप ने मांग की थी कि समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने के लिए यूरोपीय देश आगे आएं और अमेरिका का साथ दें। इस टकराव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है, जो अब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
यूरोपीय देशों ने ट्रंप को क्या जवाब दिया?
जर्मनी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नाटो (NATO) का युद्ध नहीं है और वे इस विवाद का हिस्सा नहीं बनेंगे। इटली ने भी कहा है कि सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति से काम लेना चाहिए। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी युद्धपोत भेजने से मना किया है, हालांकि उन्होंने सुरक्षा के लिए माइन-हंटिंग ड्रोन देने का सुझाव दिया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर सहयोगी देश रास्ता खुलवाने में मदद नहीं करते हैं, तो नाटो का भविष्य बहुत खराब हो सकता है। ट्रंप का कहना है कि जो देश इस रास्ते का फायदा उठाते हैं, उन्हें मदद करनी चाहिए।
ईरान का स्टैंड और आम लोगों पर असर
ईरान का कहना है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद नहीं किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बताया कि भारत और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के जहाज यहां से गुजर सकते हैं। हालांकि, अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। इस तनाव के कारण समुद्री बीमा कंपनियों ने अपना प्रीमियम 1000% तक बढ़ा दिया है। दुनिया का 20% से ज्यादा कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। इस विवाद के कारण पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं, जिसका सीधा असर गल्फ में काम करने वाले भारतीयों और आम जनता की जेब पर पड़ेगा।




