Donald Trump का बड़ा बयान, ईरान के कई नेता गायब, सऊदी और कुवैत में 15 ड्रोन हमले हुए नाकाम
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की वर्तमान स्थिति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के कुछ नेता बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल यह साफ नहीं है कि देश को असल में कौन चला रहा है। अमेरिका और इजराइल के सैन्य अभियान के कारण मिडिल ईस्ट में भारी तनाव बना हुआ है। इस बीच सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों को भी ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है, जिन्हें वहां की सेना ने समय रहते नाकाम कर दिया है।
ईरान के साथ बातचीत पर क्या बोले Donald Trump?
Donald Trump ने जानकारी दी कि ईरान के कई बड़े और पुराने नेता अब अपने पदों पर नहीं हैं। ऐसी खबरें आ रही हैं कि ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei और अन्य कई बड़े सैन्य अधिकारियों की मौत हो चुकी है या उनकी तबीयत बेहद खराब है। अमेरिका का मानना है कि वहां अब एक नई या अस्थाई कमिटी सरकार के काम देख रही है। अमेरिका की तरफ से Jared Kushner, Steve Witkoff और CENTCOM कमांडर Admiral Brad Cooper जैसे लोग बातचीत की प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं।
Trump का कहना है कि ईरान ने बातचीत के लिए काफी लंबा इंतजार किया और अब उनके पुराने प्रस्तावों का कोई मतलब नहीं रह गया है। अमेरिका की ओर से अब तक ईरान के लगभग 48 से 50 बड़े अधिकारियों को निशाना बनाया जा चुका है। इसके अलावा 2026 में होने वाले FIFA World Cup की सुरक्षा को लेकर भी ईरानी अधिकारियों ने सवाल उठाए हैं, जिसमें ईरान की टीम को भी खेलना है।
सऊदी अरब और खाड़ी देशों पर इसका क्या असर है?
इस पूरे विवाद का असर खाड़ी देशों और वहां रहने वाले आम लोगों पर भी काफी पड़ रहा है। पिछले 24 घंटों में सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने Al-Kharj इलाके में 11 ड्रोन मार गिराए हैं। वहीं कुवैत ने भी अपनी सीमा में 4 ड्रोन हमलों को नाकाम किया है। लगातार हो रहे इन हमलों से पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है और हवाई रास्तों पर भी निगरानी रखी जा रही है।
अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के 7,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता करीब 90 से 95 प्रतिशत तक कम हो गई है। इसके अलावा Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों का रास्ता पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे व्यापार पर असर पड़ रहा है। Trump ने मांग की है कि सऊदी अरब, UAE, चीन और यूरोप के देश मिलकर एक ‘Hormuz Coalition’ बनाएं और अपने युद्धपोत भेजें ताकि इस अहम रास्ते को सुरक्षित रखा जा सके।




