Gulf Crisis Update: अमेरिका और ईरान युद्ध से खाड़ी देशों को भारी नुकसान, 37 हज़ार फ्लाइट्स रद्द
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब पूरी दुनिया के साथ-साथ खाड़ी देशों (Gulf Countries) पर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। कतर, यूएई (UAE) और सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को इस संघर्ष के कारण भारी नुकसान हो रहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के आर्थिक प्रभाव से खाड़ी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। तेल और गैस के उत्पादन से लेकर आम लोगों की हवाई यात्राओं तक सब कुछ इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है।
खाड़ी देशों में तेल उत्पादन और उड़ानों पर असर
युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासियों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फ्लाइट और एयरपोर्ट संचालन में लगातार दिक्कतें आ रही हैं।
- 28 फरवरी से अब तक 37,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं।
- दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) पर उड़ानों का संचालन रुक-रुक कर हो रहा है।
- 17 मार्च को यूएई (UAE) ने मिसाइल हमले के कारण अपना एयरस्पेस कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद कर दिया था।
- खाड़ी देशों का रोजाना तेल उत्पादन 21 मिलियन बैरल से गिरकर 14 मिलियन बैरल रह गया है।
- कतर ने गैस एक्सपोर्ट पर Force Majeure लागू कर दिया है, जिससे दुनिया की 20% LNG सप्लाई रुक गई है।
Strait of Hormuz और सुरक्षा हालात
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ़ किया है कि अमेरिका और इजराइल के जहाजों के लिए Strait of Hormuz को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। हालांकि, भारत, चीन और पाकिस्तान के ईंधन जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। हाल ही में पाकिस्तान के झंडे वाले जहाज कराची को सुरक्षित रास्ता दिया गया। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने बताया है कि तेल की ग्लोबल सप्लाई बनाए रखने के लिए रिजर्व से 1.4 अरब बैरल तेल जारी किया जा रहा है। इसके अलावा, ईरान द्वारा यूएई के फुजैरा और कतर के दोहा में तेल व औद्योगिक क्षेत्रों पर हमले की भी आधिकारिक पुष्टि हुई है।
प्रवासियों और आम लोगों के लिए चिंता
इस युद्ध का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों पर भी पड़ रहा है। 17 मार्च को अबू धाबी में मिसाइल के टुकड़े लगने से एक पाकिस्तानी नागरिक की जान चली गई। इसके अलावा, टूरिज्म, शिपिंग और बिजनेस में रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है। अमेरिका ने भी बाहर से आने वाले सामानों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह हालात लंबे समय तक बने रहे तो खाड़ी देशों में नौकरी और व्यापार करने वाले लोगों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।




