Strait of Hormuz Update: होर्मुज में जहाजों की आवाजाही 135 से घटकर 10 हुई, कच्चे तेल का भाव 103 डॉलर के पार
दुनिया भर में व्यापार के लिए सबसे अहम रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है। S&P Global Energy की रिपोर्ट के अनुसार मार्च की शुरुआत से इस रास्ते पर हर दिन 10 से भी कम जहाज गुजर रहे हैं। फरवरी में यह आंकड़ा औसतन 135 जहाज प्रतिदिन था। इस भारी गिरावट से दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) और अन्य जरूरी सामानों की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है।
जहाजों की आवाजाही में 97 प्रतिशत की गिरावट
Lloyd’s List Intelligence के आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च से 15 मार्च 2026 के बीच इस रास्ते से केवल 89 जहाज ही गुजर सके जिनमें 16 ऑयल टैंकर शामिल थे। 16 मार्च को केवल दो जहाजों ने इसे पार किया जो सामान्य कमर्शियल दिनों के मुकाबले 97 प्रतिशत कम है। वहीं 14 मार्च पहला ऐसा दिन रहा जब यहां से एक भी कमर्शियल जहाज नहीं गुजरा। सुरक्षा कारणों से Maersk, Hapag-Lloyd और CMA CGM जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से जाना बंद कर दिया है। अब ये जहाज ‘Cape of Good Hope’ से होकर जा रहे हैं जिससे डिलीवरी में 10 से 20 दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है। हालांकि कूटनीतिक बातचीत के बाद भारत के जहाज ‘Shivalik’ और ‘Nanda Devi’ तथा पाकिस्तान का जहाज ‘Karachi’ इस रास्ते से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।
दुनिया और आम आदमी पर इसका सीधा असर
इस संकट के कारण दुनिया भर में सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। S&P Global के वाइस चेयरमैन डैनियल येरगिन ने इसे इतिहास में तेल उत्पादन का सबसे बड़ा संकट बताया है। बाजार और आम जनता पर इसके प्रमुख असर कुछ इस प्रकार हैं:
- कच्चे तेल के दाम: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है।
- ईंधन की कमी: रिफाइनरी के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने से कच्चे तेल से ज्यादा रिफाइंड ईंधन की कमी बाजार में होने लगी है।
- भाड़े में बढ़ोतरी: खाड़ी देशों से चीन तक क्रूड भेजने का खर्च 461 प्रतिशत बढ़कर 62.07 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गया है।
- सप्लाई पर रोक: दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG (Liquefied Natural Gas) इसी रास्ते से होकर जाता है जो फिलहाल प्रभावित है।
- खेती पर संकट: संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में एक तिहाई फर्टिलाइजर का व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसके रुकने से दक्षिण एशिया और अफ्रीका में कृषि चक्र पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।




