इजराइल ने पहली बार उत्तरी ईरान पर किया हमला, ईरान के खुफिया मंत्री की मौत के बाद तनाव बढ़ा
इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। 18 मार्च 2026 को इजराइल ने पहली बार आधिकारिक तौर पर उत्तरी ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला करने का ऐलान किया है। इस हमले में ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब की मौत हो गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और उड़ानों पर असर पड़ सकता है।
🚨: US Counterterrorism Chief Joe Kent का इस्तीफा, ईरान के साथ युद्ध को बताया गलत और इजरायल पर लगाए आरोप।
इजराइल ने ईरान के किन ठिकानों को निशाना बनाया?
इजराइली सेना ने बताया कि उनके विमानों ने उत्तरी ईरान के बंदर अनज़ाली पोर्ट पर ईरानी नौसेना के ठिकानों को निशाना बनाया है। इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने पुष्टि की है कि पिछले कुछ घंटों में उन्होंने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब के साथ-साथ सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी को भी मार गिराया है। इजराइल का कहना है कि अब ईरान में किसी भी बड़े अधिकारी को छूट नहीं मिलेगी। इन हमलों से ईरान के रक्षा तंत्र को काफी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं।
खाड़ी देशों और तेल सप्लाई पर क्या असर हुआ?
जंग की आग अब तेल और गैस के ठिकानों तक पहुंच गई है जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। इसके मुख्य असर नीचे दिए गए हैं:
- इज़राइल ने ईरान के बुशहर और असलुयेह में गैस सुविधाओं पर हमले किए।
- ईरान ने पलटवार करते हुए कतर के रास लफान औद्योगिक शहर को निशाना बनाया जिससे वहां आग लग गई।
- यूएई ने अपनी सीमा की ओर आ रही 13 बैलिस्टिक मिसाइलों और 27 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।
- कतर और ओमान ने ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।
- लेबनान में भी इजराइल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों और पुलों को निशाना बनाना तेज कर दिया है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और भविष्य के संकेत
ईरान ने इजराइल के हमलों का जवाब देने के लिए तेल अवीव और रामत गन जैसे इलाकों में मिसाइलों की बौछार कर दी है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने चेतावनी दी है कि उनके शहीदों के खून का बदला जल्द लिया जाएगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि इस तनाव के नतीजे पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं। अमेरिकी खुफिया विभाग के अनुसार ईरान की सैन्य शक्ति को इन हमलों से काफी चोट पहुंची है लेकिन वहां की सरकार अभी भी काम कर रही है।




