मिडिल ईस्ट में तनाव: ईरान का कतर के गैस प्लांट पर हमला, सऊदी अरब ने रियाद की ओर आती मिसाइलें गिराईं
खाड़ी देशों में युद्ध का खतरा काफी बढ़ गया है और इसका असर अब पड़ोसी देशों पर भी दिखने लगा है। इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने कतर के रास लफान (Ras Laffan) गैस प्लांट को निशाना बनाया है। ताजा जानकारी के मुताबिक ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमलों के कारण कतर के इस बड़े गैस क्षेत्र में आग लग गई और काफी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, जहां सुरक्षा बलों ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।
कतर और सऊदी अरब में क्या हुआ?
- ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइलें दागीं जो दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी सुविधा है।
- सऊदी अरब ने रियाद की तरफ आती 4 से 8 बैलिस्टिक मिसाइलों और 15 ड्रोन्स को इंटरसेप्ट करके नष्ट किया।
- कतर के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और ईरानी राजनयिकों को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया है।
- इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर किए गए हमले के जवाब में ईरान ने यह कार्रवाई की है।
आम जनता और तेल की कीमतों पर असर
इस हमले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई है। सऊदी अरब और कतर में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि तनाव बढ़ने से वहां की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रियाद के इंडस्ट्रियल जोन और एयर बेस के पास धमाकों की खबरें हैं लेकिन तेल क्षेत्रों पर सीधे हमले की पुष्टि नहीं हुई है।
| क्षेत्र | घटना | असर |
|---|---|---|
| कतर (Ras Laffan) | मिसाइल हमला | गैस रिफाइनरी में आग और भारी नुकसान |
| सऊदी अरब (Riyadh) | मिसाइल इंटरसेप्ट | राजधानी के आसमान में धमाके और हाई अलर्ट |
| तेल बाजार | 6% कीमतों में उछाल | दुनिया भर में ईंधन महंगा होने का डर |
ईरान की नई चेतावनी
ईरान के सुरक्षा बलों ने खाड़ी देशों के अन्य ऊर्जा केंद्रों जैसे यूएई के अल होसन और सऊदी के जुबैल को भी खाली करने की चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि अगर उस पर हमले जारी रहे तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस सप्लाई को रोक देगा। कतर ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा के अधिकार की बात कही है। इस तनाव से खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों की सुरक्षा और उनकी उड़ानों पर आने वाले दिनों में बड़ा असर पड़ सकता है।




