रियाद में खाड़ी और इस्लामी देशों की बड़ी बैठक, ईरान के हमलों की कड़ी निंदा और लिया गया सख्त फैसला
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बुधवार 18 मार्च 2026 को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ईरान द्वारा क्षेत्र के विभिन्न देशों पर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों पर गंभीर चर्चा हुई। गुरुवार को जारी एक साझा बयान में सभी सदस्य देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया।
बैठक में किन मुख्य बिंदुओं पर बनी सहमति?
बैठक के दौरान मंत्रियों ने ईरान के हमलों के खिलाफ एक सुर में अपनी आवाज उठाई। साझा बयान में कहा गया कि रिहायशी इलाकों, तेल सुविधाओं, पानी के प्लांट और हवाई अड्डों जैसे नागरिक ठिकानों पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। मंत्रियों ने निम्नलिखित मांगों और फैसलों पर जोर दिया:
- ईरान को तुरंत अपने हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने की चेतावनी दी गई।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत देशों के आत्मरक्षा के अधिकार को दोहराया गया।
- ईरान से पड़ोसी देशों के आंतरिक मामलों में दखल न देने और संप्रभुता का सम्मान करने को कहा गया।
- सशस्त्र मिलिशिया समूहों को फंडिंग और हथियार मुहैया कराना बंद करने की अपील की गई।
- समुद्री रास्तों जैसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में बाधा न डालने की हिदायत दी गई।
क्षेत्र में हालिया हमलों और स्थिति पर ताजा अपडेट
सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि हमलों के कारण ईरान के साथ बना भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है। हाल के दिनों में हुए नुकसान की जानकारी नीचे दी गई है:
| स्थान | घटना का विवरण |
|---|---|
| UAE | हबशान गैस सुविधा और बाब फील्ड पर मिसाइल हमला, जिसे डिफेंस सिस्टम ने नाकाम किया |
| Qatar | रास लफान गैस सुविधा पर हमला, भारी नुकसान और आग लगने की रिपोर्ट |
| Saudi Arabia | रियाद और पूर्वी क्षेत्र में कई ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें इंटरसेप्ट की गईं |
| Israel & West Bank | ईरानी मिसाइल हमलों में तीन महिलाओं सहित चार लोगों की मौत की खबर |
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल और गैस केंद्रों पर हमलों से काम और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। यूएई और कतर जैसे देशों में बड़ी संख्या में प्रवासी काम करते हैं और मौजूदा तनाव उनकी यात्रा योजनाओं और सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकता है।




