Qatar News: Strait of Hormuz में ईरान की धमकियों पर कतर ने जताई कड़ी आपत्ति, लंदन में दी चेतावनी
कतर ने लंदन में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के एक विशेष सत्र में Strait of Hormuz में समुद्री नेविगेशन को लेकर ईरान की धमकियों की कड़ी निंदा की है। कतर ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि ये गतिविधियां अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और इससे वैश्विक व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। यह बयान 19 मार्च 2026 को लंदन में हुई बैठक के दौरान दिया गया है।
Strait of Hormuz में सुरक्षा संकट और ताजा हमले
इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। 19 मार्च को ही कतर के तट के पास Ras Laffan Industrial City के पास एक जहाज पर हमला हुआ। इसके साथ ही UAE के Khor Fakkan बंदरगाह के पास भी एक जहाज में आग लगने की घटना सामने आई है। 28 फरवरी 2026 से ही ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव के चलते यह समुद्री मार्ग काफी असुरक्षित बना हुआ है।
- फंसे हुए नाविक: Persian Gulf में लगभग 3,200 जहाजों पर 20,000 नाविक फंसे हुए हैं।
- जान-माल का खतरा: हमलों में अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 4 लोग लापता हैं।
- व्यापार पर असर: इस रास्ते के प्रभावित होने से दुनिया भर में खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है।
समुद्री सुरक्षा के लिए कतर के प्रयास और वैश्विक रुख
कतर के राजदूत Sheikh Abdullah bin Mohammed bin Saud Al Thani ने कहा कि ईरान के हमले समुद्री सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा हैं। कतर ने अपने क्षेत्र और GCC देशों पर होने वाले हमलों को अस्वीकार्य बताया है। इस संकट को सुलझाने के लिए दुनिया के कई बड़े देश अब एकजुट हो रहे हैं और समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
| देश/संस्था | ताजा अपडेट और रुख |
|---|---|
| Qatar | Strait of Hormuz को खुला रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी |
| 6 प्रमुख सहयोगी | UK, France और Germany सहित अन्य देश सुरक्षा में मदद को तैयार |
| IMO | नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित कॉरिडोर पर चर्चा |
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Majed al-Ansari के अनुसार Strait of Hormuz वैश्विक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि जब तक ईरान हमले नहीं रोकता तब तक कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।




