UAE का बड़ा कदम: ईरान के समुद्री हमलों के खिलाफ प्रस्ताव पास, 115 से ज्यादा देशों ने दिया साथ
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की काउंसिल द्वारा लिए गए फैसले का स्वागत किया है। लंदन में हुई विशेष बैठक में ईरान द्वारा जहाजों पर किए जा रहे हमलों और Strait of Hormuz को बंद करने की धमकियों की कड़ी निंदा की गई है। UAE द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को दुनिया भर के 115 से ज्यादा देशों का समर्थन मिला है जो IMO के इतिहास में अब तक का एक रिकॉर्ड है। यह फैसला समुद्री सुरक्षा और नाविकों की जान बचाने के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है।
👉: Qatar News: Strait of Hormuz में ईरान की धमकियों पर कतर ने जताई कड़ी आपत्ति, लंदन में दी चेतावनी।
ईरान के खिलाफ इस प्रस्ताव में क्या मुख्य बातें कही गई हैं?
IMO काउंसिल ने ईरान द्वारा जहाजों पर किए जा रहे हमलों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ और गलत बताया है। काउंसिल ने साफ कहा कि Strait of Hormuz को बंद करने की कोशिश करना समुद्री पर्यावरण और नाविकों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। इसके साथ ही GCC देशों और Jordan पर हुए हमलों की भी सख्त शब्दों में निंदा की गई है। बैठक में यह बात दोहराई गई कि इस तरह के हमलों से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर बुरा असर पड़ता है। इस सत्र की अध्यक्षता Spain के Víctor Jiménez Fernandez ने की और Morocco ने इसका साथ दिया।
समुद्री सुरक्षा और देशों की प्रतिक्रिया से जुड़ी अहम जानकारी
इस पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े कदम उठाए गए हैं और विभिन्न देशों ने अपनी राय दी है। इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है:
| विषय | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| UN Security Council | 11 मार्च 2026 को प्रस्ताव 2817 पास कर ईरान से हमले तुरंत रोकने की मांग की गई थी। |
| Qatar का बयान | कतर ने ईरान के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और सप्लाई चेन के लिए खतरा बताया है। |
| Australia की राय | ऑस्ट्रेलिया ने ईरान पर समुद्री रास्तों को डर और संघर्ष का मैदान बनाने का आरोप लगाया है। |
| UAE की भूमिका | UAE ने इस सत्र की शुरुआत कराई और समुद्री सुरक्षा के लिए साझा जिम्मेदारी पर जोर दिया है। |
| सुरक्षा प्रयास | UAE समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए US के नेतृत्व वाली कोशिशों में शामिल होने पर विचार कर सकता है। |
इस फैसले के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि समुद्री रास्तों पर तनाव कम होगा। अरब देशों के साथ-साथ दुनिया भर के बड़े देशों ने एक सुर में इन हमलों को रोकने की बात कही है। समुद्री संगठनों ने भी नाविकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई है।




