राघव चड्ढा ने ‘सरपंच पति’ प्रथा पर जताई चिंता, पंचायतों में महिलाओं को असली अधिकार देने की मांग
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने पंचायतों में ‘सरपंच पति’ या ‘पंचायत पति’ की बढ़ती प्रथा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने 19 मार्च 2026 को सरकार से आग्रह किया कि आरक्षित सीटों पर चुनी गई महिला प्रतिनिधियों को उनकी शक्तियों का इस्तेमाल करने दिया जाए। Chadha ने इसे संविधान की भावनाओं के खिलाफ एक प्रॉक्सी शासन करार दिया है।
क्या है सरपंच पति प्रथा और क्यों उठ रहे हैं सवाल?
सरपंच पति सिस्टम में महिला प्रतिनिधि केवल नाम की मुखिया होती हैं, जबकि उनके पुरुष रिश्तेदार सारा काम और फैसले लेते हैं। Raghav Chadha ने कहा कि 73वें संविधान संशोधन ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया ताकि वे जमीनी स्तर पर फैसले ले सकें। लेकिन वर्तमान सिस्टम में कई जगह महिलाएं सिर्फ रबर स्टैंप बनकर रह गई हैं और असली सत्ता उनके पति या पुरुष रिश्तेदारों के पास होती है।
सरकार और प्रशासन की अब तक की कार्रवाई
इस प्रथा को रोकने के लिए सरकार और विभिन्न संस्थाओं ने कई निर्देश जारी किए हैं। Ministry of Panchayati Raj ने हाल ही में ‘Say No To Proxy Sarpanch’ नाम से एक अभियान चलाया था जो 18 मार्च 2026 को खत्म हुआ। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण कदम इस प्रकार हैं:
- National Human Rights Commission (NHRC) ने इसे महिलाओं की गरिमा और समानता के अधिकार का उल्लंघन माना है।
- राजस्थान सरकार ने 2020 में एक कानून पास किया था जिसमें सत्ता का दुरुपयोग करने वाली महिला प्रतिनिधियों को पद से हटाने का प्रावधान है।
- मंत्रालय की सलाहकार समिति ने ऐसे मामलों में पुरुष रिश्तेदारों के खिलाफ सख्त जुर्माना लगाने की सिफारिश की है।
- सुप्रीम कोर्ट ने भी इस व्यवस्था को असंवैधानिक और गैरकानूनी बताया है।
Raghav Chadha का कहना है कि यह प्रथा एक तरह की समांतर अनौपचारिक सत्ता पैदा करती है जो लोकतंत्र को कमजोर करती है। उन्होंने मांग की कि स्थानीय निकायों में महिलाओं की असली भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।




