तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल, यूरोप और जापान ऊर्जा बाज़ार संभालने के लिए तैयार
खाड़ी देशों में चल रहे तनाव और तेल ठिकानों पर हुए हमलों के बाद दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने एक साथ मिलकर बाज़ार को स्थिर करने का फैसला लिया है। इन देशों ने ईरान से नागरिक बुनियादी ढांचों और तेल-गैस प्लांट पर हमले रोकने की अपील की है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) भी बाज़ार में तेल की कमी दूर करने के लिए अपने भंडार खोलने की तैयारी कर रही है।
किन देशों ने क्या बड़े फैसले लिए हैं?
यूरोपीय देशों और जापान ने साझा बयान जारी कर ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता लाने की बात कही है। इन्होंने समुद्री रास्तों, खास तौर पर Strait of Hormuz की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग देने का वादा किया है। इसके अलावा, तेल उत्पादक देशों के साथ मिलकर सप्लाई बढ़ाने की योजना पर काम हो रहा है। इन देशों ने ईरान से समुद्री जहाजों को रोकने और ड्रोन हमले बंद करने का आग्रह किया है ताकि व्यापार सुरक्षित रहे।
ऊर्जा संकट और बाज़ार पर इसका असर
पिछले कुछ दिनों में हमलों की वजह से कतर, सऊदी अरब और कुवैत के तेल और गैस प्लांट को निशाना बनाया गया है। कतर की Ras Laffan फैसिलिटी को भारी नुकसान हुआ है, जिसे ठीक करने में 3 से 5 साल लग सकते हैं। इससे दुनिया में होने वाली कुल LNG सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। बाज़ार की ताज़ा स्थिति नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है:
| विषय | ताज़ा अपडेट |
|---|---|
| Brent Crude की कीमत | $119 प्रति बैरल से ज्यादा |
| गैस की कीमतों में उछाल | 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी |
| IEA तेल भंडार की रिलीज | 300 से 400 मिलियन बैरल |
| कतर गैस सप्लाई में कमी | कुल क्षमता का छठा हिस्सा प्रभावित |
जर्मनी और अन्य देशों के नेताओं का कहना है कि वे स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं। इस संकट का असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और वहां से होने वाले व्यापार पर भी पड़ सकता है क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने का डर है।




