ईरान में युद्ध और मिसाइल हमलों के बीच मनाया गया नौरोज़, 1,444 लोगों की मौत के बाद भी जारी है जश्न
ईरान में इस साल पारसी नववर्ष नौरोज़ का त्यौहार बम और मिसाइलों के साये में मनाया गया। 1980 के दशक में इराक के साथ हुए युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब ईरान युद्ध जैसी गंभीर स्थिति में अपना सबसे बड़ा त्यौहार मना रहा है। 20 मार्च 2026 को स्थानीय समय के अनुसार शाम 06 बजकर 15 मिनट पर नए साल की शुरुआत हुई। हालांकि देश में तनावपूर्ण माहौल है, लेकिन फिर भी तेहरान के बाज़ारों में लोगों की भीड़ फूलों की खरीदारी और एक-दूसरे को बधाई देने के लिए उमड़ी।
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ईरान में मौजूदा हालात और आम जनता पर असर
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने नए साल के मौके पर राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने आने वाले साल को ‘प्रतिरोध अर्थव्यवस्था’ का वर्ष बताया और कहा कि दुश्मन को शिकस्त दी गई है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि ईरान ने तुर्की या ओमान पर हमले किए हैं। खामेनेई ने इन खबरों को पड़ोसी देशों के बीच फूट डालने की एक साजिश बताया।
देश के कई हिस्सों में हालात काफी खराब हैं। सरकार ने लोगों को भरोसा दिया है कि देश में ईंधन यानी पेट्रोल की कोई कमी नहीं होगी, हालांकि पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सुरक्षा के लिहाज़ से देश में इंटरनेट सेवा को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया है जिससे 9.2 करोड़ लोगों का दुनिया से संपर्क टूट गया है।
युद्ध में अब तक का नुकसान और खाड़ी देशों पर प्रभाव
28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष ने ईरान और उसके पड़ोसी देशों में भारी तबाही मचाई है। युद्ध के कारण हुए नुकसान और अहम घटनाओं का विवरण नीचे दिया गया है।
| विवरण | प्रभावित क्षेत्र/संख्या |
|---|---|
| ईरान में हताहत | 1,444 लोगों की मौत और 18,551 घायल |
| इजराइल की स्थिति | 4,000 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती |
| कुवैत में घटना | मीना अल-अहमदी रिफाइनरी में आग लगी |
| सऊदी अरब | सऊदी ने अपनी सीमा में आते ड्रोन को मार गिराया |
| सैन्य क्षति | IRGC प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की हमले में मौत |
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने साफ किया है कि युद्ध के बावजूद मिसाइलों का उत्पादन जारी रहेगा। दूसरी तरफ अमेरिका अब मिडिल ईस्ट में अपने और मरीन सैनिकों की तैनाती कर रहा है। इजराइल ने भी ईरान के नूर इलाके में सैन्य कार्रवाई की बात कही है। इस त्यौहार के मौके पर कई परिवार उन लोगों की कब्रों पर भी पहुंचे जिन्होंने हालिया विरोध प्रदर्शनों और युद्ध के दौरान अपनी जान गंवाई है।




