सऊदी अरब ने सीरिया पर इजरायली हमले की कड़ी निंदा की, अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने दक्षिणी सीरिया में सैन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। शनिवार, 21 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में किंगडम ने इन हमलों को अंतर्राष्ट्रीय कानून और सीरिया की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से साथ खड़ा है।
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इजरायल ने सीरिया पर हमला क्यों किया और सऊदी का रुख क्या है?
इजरायली सेना ने घोषणा की थी कि उन्होंने दक्षिणी सीरिया में सरकारी सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटरों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया है। इजरायल का दावा है कि यह कार्रवाई स्वेदा प्रांत में द्रुज़ नागरिकों पर हुए हमलों के जवाब में की गई थी। हालांकि, सऊदी अरब ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे 1974 के डिसइंगेजमेंट एग्रीमेंट का उल्लंघन बताया है। किंगडम ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इजरायल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के बार-बार किए जा रहे उल्लंघन को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
किन देशों ने इस हमले का विरोध किया और ताजा स्थिति क्या है?
- सऊदी अरब: मंत्रालय ने हमलों को सीरिया की एकता पर हमला बताया और एकजुटता प्रकट की।
- मिस्र और जॉर्डन: इन देशों ने भी इजरायली कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा माना।
- तुर्की: तुर्की के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को एक खतरनाक उकसावा करार दिया है।
- कतर और कुवैत: इन देशों ने भी सीरिया की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही है।
- सीरिया का जवाब: सीरियाई विदेश मंत्रालय ने इजरायली तर्कों को मनगढ़ंत बहाना बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली हमलों से पहले स्वेदा प्रांत में सरकारी बलों और स्थानीय लड़ाकों के बीच झड़पें हुई थीं। सऊदी अरब ने दोहराया है कि वह सीरिया में सुरक्षा और स्थिरता हासिल करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तरह के तनाव से मिडिल ईस्ट के सुरक्षा माहौल पर सीधा असर पड़ता है।




