TotalEnergies के CEO ने दी चेतावनी, 6 महीने से ज्यादा चला ईरान युद्ध तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था होगी बर्बाद
फ्रांस की दिग्गज तेल कंपनी TotalEnergies के CEO Patrick Pouyanne ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि अगर यह संघर्ष 6 महीने से अधिक समय तक चलता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और भारी नुकसान होगा। फिलहाल ईरान ने Strait of Hormuz को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है, जिससे हर दिन बाजार में आने वाला 10 मिलियन बैरल तेल रुक गया है।
तेल की सप्लाई और ग्लोबल मार्केट पर क्या असर होगा?
Patrick Pouyanne ने चीन में एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि दुनिया के पास अभी इतना तेल स्टॉक है कि वह 3 से 4 महीने तक युद्ध का दबाव झेल सकता है। लेकिन अगर जंग इससे ज्यादा लंबी खिंचती है, तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। Strait of Hormuz एक ऐसा रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल प्राप्त करता है और इसकी भरपाई किसी दूसरे देश के उत्पादन से नहीं की जा सकती। जंग की वजह से TotalEnergies ने पहले ही कतर, इराक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अपने उत्पादन में 15 प्रतिशत की कटौती कर दी है।
युद्ध के ताजा हालात और किन देशों पर है खतरा?
पिछले 24 घंटों में युद्ध काफी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है और परमाणु ठिकानों के पास भी हमले हुए हैं। ईरान ने इजरायल के डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास मिसाइलें दागी हैं, जिसके जवाब में इजरायल ने तेहरान पर हवाई हमले किए हैं। इस तनाव के बीच अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां इस प्रकार हैं:
| पक्ष | मुख्य घटना या धमकी |
|---|---|
| अमेरिका | ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि रास्ता खोलें वरना पावर प्लांट तबाह होंगे |
| ईरान | धमकी दी है कि हमला हुआ तो पूरे मिडिल ईस्ट के IT और पानी प्लांट नष्ट कर देंगे |
| G7 देश | ईरान से तुरंत हमले रोकने और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने की मांग की है |
| WHO | परमाणु केंद्रों के पास हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई है |
ईरान के ऊर्जा मंत्री के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों से उनके देश के पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं इजरायल की सेना ने दक्षिणी लेबनान में भी हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और विशेष रूप से भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चैन रुकने से दैनिक जीवन की लागत बढ़ सकती है।




