West Asia Conflict: मनीष तिवारी ने जताई चिंता, खाड़ी में तनाव से भारत की सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर बड़ा खतरा
पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष ने दुनिया भर की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। कांग्रेस सांसद Manish Tewari ने आगाह किया है कि अगर कूटनीति से काम नहीं लिया गया, तो कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और खाद जैसी जरूरी चीजों की किल्लत बढ़ सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, ऐसे में यह स्थिति आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकती है।
खाड़ी देशों में जारी तनाव का भारत पर क्या होगा असर?
Manish Tewari के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाला तेल का व्यापार 22 मिलियन बैरल से घटकर महज 0.5 मिलियन बैरल रह गया है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में लगभग 3,000 जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें खाद और अन्य जरूरी सामान लदा है। International Energy Agency (IEA) ने भी चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया के नौ देशों में 40 से ज्यादा ऊर्जा संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, जिससे पेट्रोकेमिकल्स और हीलियम की भारी कमी हो सकती है।
भारत सरकार ने स्थिति संभालने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
भारतीय कंपनियों पर शिपमेंट में देरी का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन सरकार और विशेषज्ञों ने मिलकर कई रणनीतियां बनाई हैं ताकि घरेलू बाजार पर इसका असर कम हो सके। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत ने तेल की जरूरतों के लिए रूस जैसे देशों से सोर्सिंग बढ़ाकर सप्लाई में विविधता लाई है।
- निर्यातकों की मदद के लिए सरकार ने 497 करोड़ रुपये की RELIEF स्कीम शुरू की है ताकि माल ढुलाई का बढ़ा हुआ खर्च कम किया जा सके।
- शिपिंग मंत्रालय ने पुष्टि की है कि फारस की खाड़ी में सभी 22 भारतीय जहाज और 611 नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
- कॉमर्स सेक्रेटरी के मुताबिक, लॉजिस्टिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप हर रोज बैठक कर रहा है।
- LPG वितरण में फिलहाल भारत के किसी भी हिस्से में कोई कमी नहीं आई है।
नीचे दी गई तालिका में प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों की स्थिति समझी जा सकती है:
| सेक्टर | आयात निर्भरता (2025-26) | प्रभाव का स्तर |
|---|---|---|
| कच्चा तेल (Crude Oil) | लगभग 87% | गंभीर |
| प्राकृतिक गैस (LNG) | लगभग 47% | मध्यम |
| खाद और दवाइयां | सप्लाई चेन पर निर्भर | चिंताजनक |
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल ऑयल मार्केट मिडिल ईस्ट की घटनाओं को लेकर काफी संवेदनशील है। चूंकि भारत अपनी तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए खाड़ी में किसी भी बड़े तनाव का सीधा असर यहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। सरकार फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में है और अपनी कूटनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर रही है।




