पश्चिम एशिया संकट पर MK Stalin ने PM Modi को घेरा, खाड़ी में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK Stalin ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह बार-बार मिलने वाली चेतावनियों के बावजूद ठोस कदम उठाने में विफल रही है। स्टालिन ने संसद में दिए गए पीएम मोदी के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने लोगों को युद्ध के प्रभावों के लिए तैयार रहने की सलाह दी थी। मुख्यमंत्री ने इसे जिम्मेदारी से पीछे हटना बताया है।
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तमिलनाडु सरकार ने किन मुद्दों पर जताई चिंता?
मुख्यमंत्री MK Stalin ने 24 मार्च 2026 को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव का तमिलनाडु और वहां के लोगों पर पड़ने वाले असर का आकलन करना था। बैठक में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई और केंद्र से कार्रवाई की मांग की गई:
- खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय: Gulf देशों में काम कर रहे तमिल नागरिकों की सुरक्षा और उनकी भारत वापसी के इंतजाम सुनिश्चित करना।
- मछुआरों की सुरक्षा: समुद्र में मछली पकड़ने गए मछुआरों को युद्ध की स्थिति में सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाना।
- LPG की सप्लाई: घरेलू उपभोक्ताओं और MSME उद्योगों के लिए LPG की आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा न आने देना।
- व्यापारिक विकल्प: अगर युद्ध की वजह से व्यापार प्रभावित होता है, तो बिजनेस के लिए दूसरे रास्ते या विकल्प तलाशना।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से क्या मांग की है?
स्टालिन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से पश्चिम एशिया में रहने वाले तमिल नागरिकों और वहां के फंसे मछुआरों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री के इस पत्र को DMK के सांसद नई दिल्ली में जाकर केंद्रीय मंत्रियों को सौंपेंगे। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार को युद्ध के प्रभावों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करनी चाहिए थी न कि आखिरी वक्त पर आम जनता को इसके लिए तैयार रहने को कहना चाहिए। विपक्षी दलों के कुछ अन्य सांसदों ने भी केंद्र के इस रवैये पर असहमति जताई है।





