PM Modi Israel Visit Update: जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के इस्राइल दौरे को बताया राजनीतिक भूल, कहा देश को चुकानी होगी कीमत
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार 24 मार्च 2026 को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष और भारत के कूटनीतिक रुख को देश के लिए एक बड़ा झटका बताया। रमेश ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इस्राइल दौरे की आलोचना की और इसे राजनीतिक इतिहास का एक गलत फैसला करार दिया। उनका कहना है कि इस दौरे की वजह से भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।
जयराम रमेश ने सरकार की कूटनीति पर क्या सवाल उठाए?
जयराम रमेश के अनुसार प्रधानमंत्री का इस्राइल दौरा उस समय हुआ जब क्षेत्र में तनाव काफी अधिक था। उन्होंने कहा कि यह दौरा ईरान पर हुए हवाई हमलों से ठीक दो दिन पहले खत्म हुआ था। रमेश ने आरोप लगाया कि इस कदम ने भारत को उस स्थिति से हटा दिया है जहां हम शांति के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते थे। उन्होंने प्रधानमंत्री की कूटनीति को असफल बताते हुए कहा कि भारत को अब इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों का भी जिक्र किया।
इस विवाद से जुड़े मुख्य घटनाक्रम और तारीखें
इस पूरे मामले में पिछले कुछ दिनों में कई बयान और घटनाएं सामने आई हैं जो इस प्रकार हैं
| तारीख | मुख्य घटनाक्रम |
|---|---|
| 28 फरवरी 2026 | अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमले किए गए |
| 5 मार्च 2026 | राहुल गांधी ने ईरानी युद्धपोत डूबने पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए |
| 23 मार्च 2026 | राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर प्रधानमंत्री के भाषण की आलोचना की |
| 24 मार्च 2026 | जयराम रमेश ने इस्राइल दौरे को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक हार बताया |
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर क्या आरोप लगाए?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के साथ समझौता किया है। गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट अब भारत के दरवाजे तक पहुंच गया है और प्रधानमंत्री इस पर संसद में चर्चा करने से बच रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की चुप्पी और हालिया भाषणों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर हुई है। कांग्रेस के विदेश विभाग ने भी चिंता जताई है कि इस दौरे से सैन्य तनाव को राजनीतिक समर्थन मिलने का संदेश गया है।




