West Asia Conflict: पीएम मोदी ने खाड़ी देशों में रह रहे 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा पर जताई चिंता, शांति को बताया ज़रूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शांति के लिए बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। यह युद्ध न केवल व्यापार और ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर रहा है, बल्कि खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। पीएम ने दुनिया भर से इस संकट को खत्म करने के लिए एकजुट होने की अपील की है और कहा है कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में खड़ा है।
भारतीय प्रवासियों और देश की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और वहां काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा भारत सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने संसद में बताया कि यह संकट लंबे समय तक चल सकता है, इसलिए हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहने की ज़रूरत है। व्यापारिक जहाजों पर हमले और समुद्री रास्तों में रुकावट को भारत ने पूरी तरह से गलत बताया है। सरकार अब घरेलू स्तर पर LPG गैस के उत्पादन को बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई रुकने से आम आदमी को कोई परेशानी न हो।
शांति बहाली के लिए भारत ने उठाए ये बड़े कदम
भारत इस मामले में किसी का पक्ष लिए बिना शांतिपूर्ण समाधान की वकालत कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में भारत सरकार की तरफ से कई अहम कदम उठाए गए हैं जो नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं:
| कदम | विवरण |
|---|---|
| डिप्लोमैटिक बातचीत | पीएम मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, ईरान, ओमान और कुवैत के नेताओं से फोन पर बात की। |
| रक्षा समीक्षा | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों और CDS के साथ हाई-लेवल मीटिंग की। |
| सुरक्षा अलर्ट | तटीय, सीमावर्ती और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को देश भर में हाई अलर्ट पर रखा गया है। |
| शिपिंग मॉनिटरिंग | समुद्री रास्तों की निगरानी बढ़ाई गई है ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके। |
भारत ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों और ज़रूरी बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से इस चुनौतीपूर्ण समय में एकजुट रहने और शांति के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह किया है। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल और अन्य ज़रूरी सामानों की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।




