Iran-UK Tension: ईरान ने ब्रिटेन को दी चेतावनी, कहा अमेरिकी और इजरायली हमलों का विरोध करना जरूरी
ईरान ने ब्रिटेन से अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को निभाने और अमेरिका व इजरायल की कार्रवाई की स्पष्ट रूप से निंदा करने का आग्रह किया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन द्वारा अपने सैन्य ठिकानों का उपयोग ईरान के खिलाफ हमलों के लिए करने की अनुमति देना, युद्ध में भागीदारी माना जाएगा। ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है और ब्रिटेन को इस मामले में अपना रुख साफ करना चाहिए।
ईरान ने ब्रिटेन के रुख पर क्या सवाल उठाए हैं?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने कहा कि ब्रिटेन और कुछ अन्य यूरोपीय देश इस पूरे विवाद में दोहरा रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब ईरान के दक्षिण पार्स (South Pars) गैस फील्ड पर हमला हुआ, तब ब्रिटेन ने इसकी निंदा करने से मना कर दिया था। इसके विपरीत, जब ईरान अपनी रक्षा में जवाबी कार्रवाई करता है, तो ब्रिटेन उसे गलत ठहराने की कोशिश करता है। Araqchi ने साफ किया कि पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जा रहा है, जिसे ऐतिहासिक रूप से याद रखा जाएगा।
इस विवाद से जुड़ी मुख्य जानकारियां और अधिकारियों के बयान
| पक्ष | मुख्य बयान और घटनाक्रम |
|---|---|
| Abbas Araqchi (ईरान) | उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अमेरिकी हमलों में साथ देकर अपने नागरिकों की जान जोखिम में डाल रहा है। |
| Yvette Cooper (ब्रिटेन) | ब्रिटिश विदेश सचिव ने ईरान से अपने हमले रोकने की अपील की और आर्थिक प्रभाव पर चिंता जताई। |
| संयुक्त राष्ट्र चार्टर | ईरान ने आत्मरक्षा के लिए Article 51 के तहत अपने अधिकारों का हवाला दिया है। |
| ब्रिटेन की जनता | ईरान का दावा है कि ब्रिटेन के ज्यादातर लोग इस युद्ध में शामिल होने के खिलाफ हैं। |
| हमलों का असर | ईरान ने कहा कि हमलावरों को किसी भी तरह की मदद देना स्थिति को और ज्यादा उलझा देगा। |




