Strait of Hormuz News: दुनिया में तेल का बड़ा संकट, 1973 से भी बुरे हालात, रोज़ाना 20 मिलियन बैरल सप्लाई ठप
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक ‘Strait of Hormuz’ के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है। Al Jazeera English की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस रास्ते के बंद होने से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई रुक गई है। यह स्थिति 1973 के मशहूर तेल संकट से कहीं ज्यादा गंभीर है, जिसमें 4.5 मिलियन बैरल की कमी आई थी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक दुनिया फिलहाल 1970 के दशक से भी बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रही है।
इस संकट से जुड़ी मुख्य बातें और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव क्या हैं?
- सप्लाई में भारी गिरावट: समुद्री रास्ता बंद होने से दुनिया की तेल सप्लाई में 11 मिलियन बैरल और गैस सप्लाई में 140 बिलियन क्यूबिक मीटर की कमी आई है।
- ईरान का दावा: ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने कहा है कि खाड़ी और Strait of Hormuz पर उनका पूरा नियंत्रण है और वे बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।
- अमेरिका की कार्रवाई: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को रास्ता खोलने के लिए 48 घंटे का समय दिया था, हालांकि फिलहाल बातचीत के चलते हमलों पर 5 दिन की रोक है।
- हमलों की रिपोर्ट: Human Rights Watch का कहना है कि 11 मार्च को दो नागरिक जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाया गया था, जो कि युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों और मौजूदा स्थिति का पूरा ब्यौरा
Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के तहत एक इंटरनेशनल जलमार्ग माना जाता है, जहाँ से जहाजों को गुजरने का पूरा अधिकार है। लेकिन वर्तमान में ईरान ने यहाँ अपनी पकड़ बेहद सख्त कर ली है। शिपिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस साल यानी 2026 के अंत तक इस रास्ते के सामान्य होने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
| मुख्य बिंदु | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| कानूनी स्थिति | UNCLOS के तहत रास्ते को रोकना पूरी तरह गैर-कानूनी है। |
| ईरान की शर्तें | केवल उन्हीं देशों के जहाज निकल सकते हैं जिन्हें ईरान अपना दुश्मन नहीं मानता। |
| वैश्विक प्रतिक्रिया | ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान सहित 20 देशों ने ईरान के कदमों की निंदा की है। |
| बातचीत में शामिल देश | चीन, भारत, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देश ईरान के साथ संपर्क में हैं। |
ईरान की डिफेंस काउंसिल ने चेतावनी दी है कि अगर उनके समुद्री किनारों पर हमला हुआ तो वे पूरे रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछा देंगे। फिलहाल केवल कृषि उत्पाद और ईरान के अपने सामान वाले जहाजों को ही कुछ शर्तों के साथ निकलने दिया जा रहा है। इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ने की संभावना है।




