Saudi Arabia और 5 अन्य देशों ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, UN ने भी जारी किया नया प्रस्ताव
सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन और जॉर्डन ने 25 मार्च 2026 को एक साझा बयान जारी कर ईरान के हमलों की कड़ी आलोचना की है। इन देशों ने ईरान की सैन्य कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन करार दिया है। इसी दिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने भी ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों की निंदा की गई है। इस स्थिति से पूरे मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है।
ℹ: अमेरिका ने कहा ईरान के खिलाफ युद्ध के लक्ष्य हुए पूरे, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब खत्म होने के करीब।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान के खिलाफ क्या फैसले लिए?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने 25 मार्च 2026 को एक प्रस्ताव अपनाया है। इस प्रस्ताव में ईरान से पड़ोसी देशों के खिलाफ अपनी सभी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत और बिना किसी शर्त के रोकने की मांग की गई है। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को इन हमलों से हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी। परिषद ने इन हमलों को राज्य की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन माना है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में स्थिति काफी संवेदनशील हो गई है और परमाणु स्थलों के करीब हो रहे हमले बहुत खतरनाक साबित हो सकते हैं।
विभिन्न देशों और संगठनों ने हमलों पर क्या कहा?
इस साझा बयान के बाद कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और देशों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। नीचे दी गई टेबल में मुख्य देशों के रुख को समझा जा सकता है:
| देश/संगठन | प्रमुख बयान |
|---|---|
| Saudi Arabia | हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया और कहा कि खाड़ी देश इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं। |
| Qatar | ईरान के हमलों को यादृच्छिक बताया और कहा कि ये हमले नागरिकों और सेवा सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं। |
| Bahrain | ईरान के उन दावों को सिरे से खारिज किया जिसमें बहरीन की जमीन के इस्तेमाल की बात कही गई थी। |
| UAE | ईरान के व्यवहार को ‘असंगत’ बताया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नींव को कमजोर कर रहा है। |
| Kuwait | अंबेसडर नासिर अब्दुल्ला ने इसे अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बताया है। |
| G7 Foreign Ministers | ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा किए गए इन हमलों को अनुचित बताते हुए खाड़ी देशों का समर्थन किया। |
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
इस बढ़ते तनाव का असर खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों पर भी पड़ रहा है। सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य विदेशी नागरिक रहते हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के कारण भविष्य में यात्रा नियमों या हवाई उड़ानों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अरब लीग और मिस्र जैसे देशों ने भी इन हमलों की निंदा की है और कहा है कि शांति चाहने वाले देशों की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए। खाड़ी देशों ने अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने का संकल्प लिया है।




