ईरान ने ठुकराया अमेरिका का 15 सूत्री शांति प्रस्ताव, रखी अपनी 5 बड़ी शर्तें, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर माँगा नियंत्रण
25 मार्च 2026 को ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्री शांति समझौते को मानने से मना कर दिया है। पाकिस्तान के माध्यम से मिले इस प्रस्ताव को ईरान के सरकारी मीडिया ने अनुचित बताया है। ईरान का कहना है कि वह युद्ध तभी रोकेगा जब उसकी खुद की पांच शर्तें पूरी की जाएंगी। इस तनाव के बीच कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी हमले की खबर है और अमेरिका ने क्षेत्र में अपने 2,000 और सैनिकों को भेजने की तैयारी कर ली है।
ईरान की वे 5 मुख्य शर्तें जो शांति के लिए जरूरी हैं
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने स्पष्ट किया है कि युद्ध खत्म करने के लिए इन शर्तों का पूरा होना अनिवार्य है। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए ये शर्तें काफी अहम मानी जा रही हैं क्योंकि इसमें समुद्री रास्ते का नियंत्रण भी शामिल है।
- अमेरिका और इजरायल के सभी सैन्य हमलों और हवाई हमलों पर तुरंत पूरी तरह से रोक लगे।
- युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए ईरान को हर्जाने का भुगतान किया जाए।
- क्षेत्रीय स्तर पर सीजफायर हो, जिसमें लेबनान और इराक जैसे मोर्चों पर भी युद्ध बंद करना शामिल है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान के पूर्ण अधिकार को मान्यता दी जाए और उसे वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने का हक मिले।
- भविष्य में ईरान के खिलाफ दोबारा युद्ध न शुरू होने की ठोस और पुख्ता गारंटी दी जाए।
अमेरिका का प्रस्ताव और मौजूदा स्थिति की जानकारी
अमेरिका ने अपने 15 सूत्री प्लान में ईरान को पाबंदियों से छूट देने की पेशकश की थी, लेकिन इसके बदले में परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल प्रोग्राम को पूरी तरह बंद करने की शर्त रखी थी। ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपनी शर्तों पर ही समझौता करेगा। नीचे दी गई टेबल से आप दोनों पक्षों की स्थिति समझ सकते हैं।
| पक्ष | मुख्य मांग या स्टैंड |
|---|---|
| ईरान | अपनी 5 शर्तों पर अड़ा है और हर्जाना चाहता है। |
| अमेरिका | परमाणु प्रोग्राम बंद करने पर पाबंदियां हटाने को तैयार है। |
| संयुक्त राष्ट्र | युद्ध रोकने के लिए नए दूत की नियुक्ति की गई है। |
| पाकिस्तान और मिस्र | दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। |
ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अमेरिका और इजरायल के जहाजों को हॉर्मुज के रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं देगा। सऊदी अरब भी इस बातचीत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है क्योंकि ईरान ने उसे पसंदीदा मध्यस्थ बताया है। फिलहाल तनाव कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं क्योंकि दोनों ओर से हमले जारी हैं।




