ईरान ने अमेरिका का शांति प्रस्ताव ठुकराया, युद्ध के हर्जाने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण अधिकार की रखी मांग
ईरान ने अमेरिका की ओर से भेजे गए 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। 26 मार्च 2026 को ईरान के सैन्य नेतृत्व ने अपनी शर्तें रखते हुए कहा कि जब तक अमेरिका युद्ध के नुकसान की भरपाई नहीं करता, तब तक कोई समझौता नहीं होगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में हमले न होने की गारंटी और संप्रभुता का सम्मान उनके लिए सबसे जरूरी है। इस घटनाक्रम के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान ने शांति बहाली के लिए कौन सी शर्तें रखी हैं?
ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपनी कड़ी शर्तें पेश की हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार Mohsen Rezaei ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, युद्ध जारी रहेगा। ईरान की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- युद्ध के दौरान हुए सभी आर्थिक नुकसान के लिए अमेरिका उचित मुआवजा दे।
- ईरान पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान की पूरी संप्रभुता को मान्यता दी जाए।
- ईरान और उसके सहयोगी समूहों के खिलाफ चल रहे सभी मोर्चों पर लड़ाई बंद की जाए।
- भविष्य में किसी भी हमले या हस्तक्षेप के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी गारंटी दी जाए।
इस विवाद पर अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का क्या कहना है?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान से बातचीत की अपील की है और कहा है कि समय रहते समझौता कर लेना बेहतर होगा। दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने खाड़ी देशों और Jordan द्वारा समर्थित एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें ईरान के हमलों की निंदा की गई है। इस बीच Israel ने दावा किया है कि उसने ईरानी नौसेना कमांडर Alireza Tangsiri को मार गिराया है, हालांकि ईरान ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने भी साफ किया कि मौजूदा संदेशों का आदान-प्रदान औपचारिक बातचीत का हिस्सा नहीं है।




