अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू, पाकिस्तान कर रहा है मध्यस्थता, खाड़ी देशों में शांति की उम्मीद
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष यानी इनडायरेक्ट बातचीत जारी है। पाकिस्तान इस समय Washington और Tehran के बीच तनाव को कम करने के लिए संदेश पहुंचाने का काम कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने इन वार्ताओं को सार्थक बताया है और संकेत दिया है कि ईरान इस विवाद से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है। यह कदम मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।
अमेरिका के 15 सूत्री प्रस्ताव में क्या शर्तें शामिल हैं?
अमेरिका ने ईरान के सामने एक विस्तृत प्रस्ताव रखा है जिस पर अभी तेहरान में गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है। इस योजना के तहत कुछ मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है जो क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।
| मुख्य विषय | प्रस्तावित शर्त |
|---|---|
| मिसाइल कार्यक्रम | ईरान के मिसाइल प्रोग्राम पर सीमाएं तय करना |
| क्षेत्रीय समूह | Hezbollah, Hamas और Houthis को समर्थन रोकना |
| Strait of Hormuz | व्यापारिक जहाजों के लिए समुद्री रास्ता खुला रखना |
| प्रतिबंध | सहयोग के बदले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना |
| परमाणु ऊर्जा | नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग देना |
खाड़ी देशों और अन्य मध्यस्थों की क्या भूमिका है?
इस कूटनीतिक प्रयास में पाकिस्तान के अलावा कतर और अन्य क्षेत्रीय देश भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कहा है कि उनका देश इन वार्ताओं की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसे अपना सम्मान मानता है।
- Qatar: कतर के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि वे सभी राजनयिक चैनलों का समर्थन करते हैं ताकि संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान हो सके।
- Iran: ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि उनकी नीति प्रतिरोध की है लेकिन मित्र देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।
- Turkey and Egypt: ये देश भी राजनयिक स्तर पर इस पूरी प्रक्रिया का समर्थन कर रहे हैं।
- GCC: खाड़ी सहयोग परिषद ने मांग की है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली किसी भी बड़ी बातचीत में उन्हें भी शामिल किया जाए।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख Field Marshal Asim Munir और अन्य उच्च अधिकारी भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जानकारों का मानना है कि मार्च 2026 का यह हफ्ता इन वार्ताओं के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अगर यह बातचीत सफल होती है तो इससे खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए भी सुरक्षा का माहौल बेहतर होगा।




