UAE पर ईरानी हमले के बाद जॉर्डन ने जताया कड़ा विरोध, मलबे की चपेट में आने से भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक की मौत
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर हुए ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की जॉर्डन ने कड़े शब्दों में निंदा की है। 26 मार्च 2026 को हुए इस हमले के दौरान अबू धाबी में मिसाइल का मलबा गिरने से एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक की जान चली गई। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को UAE की संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने साफ किया है कि जॉर्डन इस मुश्किल घड़ी में पूरी तरह से अमीरात के साथ खड़ा है।
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हमले में हुए नुकसान और हताहतों का विवरण
अबू धाबी मीडिया ऑफिस ने पुष्टि की है कि Sweihan Street पर मिसाइल इंटरसेप्ट होने के बाद गिरे मलबे की वजह से यह हादसा हुआ। इस घटना में तीन अन्य लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें एक भारतीय, एक जॉर्डन का नागरिक और एक अमीराती नागरिक शामिल है। UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने ईरान की तरफ से दागी गई 15 बैलिस्टिक मिसाइलों और 11 ड्रोन (UAV) को मार गिराया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| हमले की तारीख | 26 मार्च 2026 |
| मृतकों की राष्ट्रीयता | भारतीय और पाकिस्तानी |
| घायलों की संख्या | 3 (भारतीय, अमीराती, जॉर्डन नागरिक) |
| कुल इंटरसेप्टेड मिसाइलें | 15 बैलिस्टिक मिसाइलें |
| कुल इंटरसेप्टेड ड्रोन | 11 ड्रोन |
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमले का विरोध और मौजूदा स्थिति
इस हमले के बाद छह अरब देशों जिसमें जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और UAE शामिल हैं, उन्होंने एक साझा बयान जारी कर इन हमलों की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने भी एक प्रस्ताव पारित कर इन हमलों को गलत ठहराया है। अमेरिका में UAE के राजदूत Yousef Al Otaiba ने कहा कि सिर्फ युद्धविराम काफी नहीं है, बल्कि ईरान की ओर से मिलने वाली धमकियों का पक्का समाधान निकालना होगा। हमलों का असर नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे हवाई अड्डों और आवासीय क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है।
प्रवासियों के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि हमलों में आम नागरिकों को नुकसान पहुँच रहा है। UAE सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें। इराक के विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश पर हमले के लिए नहीं होने देंगे। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं।




