मिडल ईस्ट युद्ध के बीच वर्ल्ड बैंक का बड़ा फैसला, बढ़ी हुई तेल कीमतों से निपटने के लिए सरकारों को देगा मदद
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच वर्ल्ड बैंक ग्रुप ने बड़ा ऐलान किया है। बैंक ने कहा है कि वह उन सभी सदस्य देशों की सरकारों की मदद करेगा जो इस समय जंग की वजह से बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस संकट की वजह से दुनियाभर में ऊर्जा यानी एनर्जी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है जिससे सरकारों के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। वर्ल्ड बैंक ने यह जानकारी 26 मार्च 2026 को जारी की है। संस्थान का कहना है कि कई देशों ने सप्लाई चेन और बढ़ते खर्चों को लेकर उनसे संपर्क किया है।
क्या है वर्ल्ड बैंक की नई योजना और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
वर्ल्ड बैंक का कहना है कि युद्ध की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है जिससे जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने इसे तेल बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट करार दिया है। इस स्थिति को संभालने के लिए मार्च 2026 में रणनीतिक भंडार से रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारा गया था। बैंक अब सरकारों को वित्तीय और तकनीकी मदद देगा ताकि वे बढ़ती महंगाई और ऊर्जा की कमी से निपट सकें।
तेल और गैस बाजार पर क्या हुआ असर?
युद्ध की वजह से एनर्जी मार्केट में काफी बड़ा बदलाव आया है। इसका असर कतर और ईरान जैसे देशों के गैस और तेल सप्लाई नेटवर्क पर भी पड़ा है। नीचे दी गई टेबल से आप स्थिति को विस्तार से समझ सकते हैं:
| विवरण | ताजा जानकारी और आंकड़े |
|---|---|
| ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत | $119 प्रति बैरल (19 मार्च 2026 तक) |
| स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रभाव | दुनिया के 20% तेल और 21% गैस की सप्लाई पर असर |
| कतर को हुआ नुकसान | लगभग $20 बिलियन के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान |
| गोल्डमैन सैक्स का अनुमान | 2026 में औसत तेल की कीमत $85 प्रति बैरल रहने की उम्मीद |
कतर के गैस कॉम्प्लेक्स में हुए नुकसान की वजह से वहां की निर्यात क्षमता पर असर पड़ने की आशंका है जिसे ठीक होने में समय लग सकता है। वहीं ईरान के गैस क्षेत्रों पर हुए हमलों ने भी वैश्विक स्तर पर सप्लाई को प्रभावित किया है। इन सब हालातों को देखते हुए वर्ल्ड बैंक ने सरकारों को सहारा देने का फैसला किया है ताकि आम जनता पर इसका बोझ कम किया जा सके।




