अरब संसद ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा- ये अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है
अरब संसद (Arab Parliament) के अध्यक्ष मोहम्मद अल-यामाही (Mohammad Al-Yamahi) ने अरब देशों पर हो रहे ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) का सीधा उल्लंघन बताया है। अल-यामाही का कहना है कि ये हमले क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बन गए हैं और अरब देशों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
इन हमलों के बारे में मुख्य जानकारी क्या है?
मार्च 2026 के दौरान खाड़ी देशों पर हुए हमलों को लेकर अरब संसद काफी सख्त नजर आ रही है। कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) के माध्यम से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ईरान की ये कार्रवाई अरब देशों की संप्रभुता का अपमान है। अल-यामाही ने जोर देकर कहा कि आवासीय क्षेत्रों, नागरिक सुविधाओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है। रियाद में हुई बैठक में सऊदी अरब, कुवैत, UAE और कतर जैसे देशों के विदेश मंत्रियों ने भी इन हमलों के खिलाफ एकजुटता दिखाई है।
किस देश पर कितने हमले हुए और क्या था नुकसान?
हाल के दिनों में ईरान की ओर से किए गए हमलों का विवरण कुछ इस प्रकार है:
| देश का नाम | ड्रोन की संख्या | मिसाइल की संख्या | प्रमुख जानकारी |
|---|---|---|---|
| Bahrain | 19 | 6 | एक कॉन्ट्रैक्टर की मौत और 5 सैनिक घायल |
| Kuwait | 13 | 17 | मिसाइल और ड्रोन से हमला |
| UAE | 17 | 5 | बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल |
| Saudi Arabia | 47 | – | बड़े पैमाने पर ड्रोन अटैक |
| Iraqi Kurdistan | – | बैलिस्टिक मिसाइल | 6 सैनिकों की मौत और 30 घायल |
क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय शामिल हैं, के लिए यह सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ी खबर है। अरब संसद ने साफ कर दिया है कि अरब देशों की सुरक्षा एक ‘रेड लाइन’ है जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का स्वागत करते हुए अल-यामाही ने मांग की है कि ईरान को अपनी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई तुरंत बंद कर देनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत प्रभावित देशों को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है, जो भविष्य में किसी भी जवाबी कार्रवाई की ओर इशारा करता है।




