ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भीषण जंग, अब 12 साल के बच्चे भी संभालेंगे सुरक्षा का मोर्चा
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। तेहरान की सड़कों पर सुरक्षा बलों ने हर तरफ नाकेबंदी कर दी है और शहर के चप्पे-चप्पे पर हथियारबंद जवान तैनात हैं। IRGC के अधिकारियों ने ऐलान किया है कि अब 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे भी गश्ती दलों का हिस्सा बन सकेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान पर लगातार हवाई हमले हो रहे हैं और देश के कई हिस्सों में भारी नुकसान पहुँचा है।
सुरक्षा बलों में बच्चों की भर्ती और नए नियम क्या हैं?
IRGC अधिकारी रहीम नदाली (Rahim Nadali) ने बताया कि सुरक्षा कामों के लिए अब कम से कम उम्र 12 साल तय की गई है। इसके लिए For Iran नाम से एक भर्ती अभियान चलाया जा रहा है जिसमें बच्चों को बसिज (Basij) मिलिशिया में शामिल किया जाएगा। इन नए जवानों का मुख्य काम सुरक्षा से जुड़े डेटा को जमा करना और रात के समय गाड़ियों की चेकिंग करना होगा। तेहरान के निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई जगहों पर किशोरों को मशीन गन के साथ पहरा देते हुए देखा है। जानकारों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है जो बच्चों को सैन्य गतिविधियों में शामिल करने से मना करता है।
ईरान और खाड़ी देशों पर इस युद्ध का क्या असर हो रहा है?
इस युद्ध का असर अब पूरे इलाके में महसूस किया जा रहा है क्योंकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। नीचे दी गई टेबल में युद्ध से जुड़ी कुछ मुख्य जानकारियां दी गई हैं:
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| हमलों के मुख्य लक्ष्य | परमाणु संयंत्र, स्टील प्लांट और तेहरान के मिलिट्री बेस |
| कुल मौतों की संख्या | अब तक लगभग 1,900 लोगों के मारे जाने की खबर है |
| जवाबी मिसाइल हमले | ईरान ने इजरायल और कुछ खाड़ी देशों को निशाना बनाया है |
| कमांडर की मौत | नेवी कमांडर अलीरेज़ा तंगसिरी (Alireza Tangsiri) के मारे जाने की खबर आई |
| सड़क पर पाबंदियां | तेहरान में जगह-जगह रोडब्लॉक और चेकपोस्ट बनाए गए हैं |
अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों ने ईरान के आर्थिक और सैन्य ठिकानों को काफी नुकसान पहुँचाया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि ईरान ने इन देशों पर भी मिसाइल हमले किए हैं जिससे हवाई सफर और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। सुरक्षा बलों का मानना है कि बच्चों को शामिल करने से स्थानीय स्तर पर निगरानी को और मजबूत किया जा सकेगा।




