ईरान के तेहरान में अमेरिका और इसराइल का मिसाइल हमला, तनाव बढ़ने से खाड़ी देशों में बढ़ी परेशानी
तेहरान के दक्षिणी रिहायशी इलाके में अमेरिका और इसराइल की तरफ से किए गए मिसाइल हमले के बाद अफरा-तफरी का माहौल है। Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक बचाव दल मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम कर रहे हैं और अब तक कई शव निकाले जा चुके हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि ईरान इसका बदला जरूर लेगा। इस संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी बुरा असर पड़ने की संभावना है।
तेहरान में हमले के बाद क्या है मौजूदा स्थिति?
ईरान के अलग-अलग शहरों में हुए इन मिसाइल हमलों ने रिहायशी इलाकों के साथ-साथ औद्योगिक ठिकानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। इस हमले के बाद की स्थिति को नीचे दी गई जानकारी से समझा जा सकता है:
| विवरण | प्रभावित क्षेत्र या संख्या |
|---|---|
| कुल मौतें | 1,900 से अधिक |
| घायल नागरिक | लगभग 20,000 |
| क्षतिग्रस्त इमारतें | 82,000 नागरिक इमारतें |
| प्रमुख ठिकाने | परमाणु संयंत्र और स्टील फैक्ट्रियां |
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने स्पष्ट किया है कि हमलों के बावजूद परमाणु संयंत्रों से रेडिएशन फैलने का कोई खतरा नहीं है। हालांकि तेहरान के रिहायशी इलाकों में एक 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत की पुष्टि हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि हजारों लोग बेघर हो गए हैं जिससे मानवीय संकट गहरा सकता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र पर असर
ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने ऐलान किया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अब उन जहाजों को गुजरने नहीं दिया जाएगा जो अमेरिका या इसराइल से जुड़े देशों के हैं। यह खबर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले व्यापार के लिए बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अब यह जंग सामान्य नहीं रहेगी और उन्होंने अमेरिकी और इसराइली कंपनियों के कर्मचारियों को काम वाली जगह खाली करने को कहा है।
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी इसराइल के प्रमुख शहरों जैसे Tel Aviv पर मिसाइलें दागी हैं। इसके अलावा सऊदी अरब के Prince Sultan Air Base पर हुए हमले में अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचने की खबर है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि उन्होंने ऊर्जा संयंत्रों पर हमले को 6 अप्रैल तक के लिए टाल दिया है ताकि कूटनीतिक बातचीत के लिए समय मिल सके। इस बीच पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।




